गांव की बेटी से SDM तक का सफर, काजल सैनी ने मेहनत से बदली तकदीर

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की पीसीएस परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनीं Kajal Saini के लिए सोमवार का दिन बेहद खास रहा। उनकी सफलता न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है। काजल का कहना है कि इस उपलब्धि के पीछे उनके माता-पिता का सबसे बड़ा योगदान है, जिन्होंने हमेशा शिक्षा को प्राथमिकता दी और शादी के बजाय पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित किया।

किसान परिवार से निकलकर बनीं SDM

हरिद्वार जिले के सड़ौली गांव की रहने वाली काजल सैनी एक साधारण किसान परिवार से आती हैं। उनके पिता रामकुमार खेती करते हैं, जबकि मां राजदुलारी गृहिणी हैं। शुरुआती शिक्षा उन्होंने Rajiv Gandhi Navodaya Vidyalaya Landhaura से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने Gurukul Kangri University से बीएएमएस (BAMS) की पढ़ाई पूरी की।

काजल बताती हैं कि बचपन में गांव के एक शिक्षक उन्हें एसडीएम और प्रशासनिक सेवाओं के बारे में बताया करते थे। वहीं से उनके मन में सिविल सेवा में जाने का सपना पैदा हुआ।

असफलताओं से नहीं टूटा हौसला

बीएएमएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद काजल ने प्रशासनिक सेवा की तैयारी शुरू कर दी। उन्होंने UPSC की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद 2021 में PCS और Lower PCS परीक्षाओं में भी उन्हें निराशा हाथ लगी।

हालांकि उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार प्रयास जारी रखे। उनकी मेहनत रंग लाई जब अक्टूबर 2025 में उन्होंने Assistant Review Officer (ARO) परीक्षा पास की और सचिवालय में नियुक्ति प्राप्त की। वर्तमान में वे इसी पद पर कार्यरत हैं और अब PCS परीक्षा पास कर SDM बनने का सपना भी पूरा कर चुकी हैं।

माता-पिता का सहयोग बना ताकत

काजल का कहना है कि उनकी सफलता की सबसे बड़ी वजह परिवार का समर्थन है। उन्होंने बताया कि माता-पिता हमेशा कहते थे कि शादी कभी भी हो सकती है, लेकिन शिक्षा और करियर के अवसर समय पर ही मिलते हैं। इसी सोच ने उन्हें अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने में मदद की।

युवाओं को दिया सफलता का मंत्र

काजल सैनी ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को सलाह दी कि केवल लंबे समय तक पढ़ाई करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि बुनियादी अवधारणाओं (Basic Concepts) को मजबूत करना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि परिवार और अच्छे दोस्तों का साथ मानसिक मजबूती देता है, जो किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने यह भी बताया कि तैयारी के दौरान वे अंग्रेजी समाचार पत्रों के साथ-साथ हिंदी अखबारों का भी नियमित अध्ययन करती थीं, जिससे समसामयिक घटनाओं और सामान्य ज्ञान को बेहतर समझने में मदद मिली।