Fraud in Uttarakhand MBBS admissions exposed; entire scheme revealed by a single mistake.
उत्तराखंड में NEET काउंसलिंग के दौरान सरकारी MBBS सीट हासिल करने के लिए कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल का मामला सामने आया है। देहरादून में हुई जांच के दौरान कई अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र संदिग्ध पाए गए। चिकित्सा शिक्षा विभाग को दस्तावेजों की जांच के दौरान गड़बड़ी का संदेह हुआ, जिसके बाद जिला प्रशासन से सत्यापन कराया गया।
मामले में संबंधित दस्तावेजों की जांच के बाद कुछ प्रमाणपत्र रद्द किए गए हैं। वहीं, संबंधित थानों में भी शिकायत और मुकदमे दर्ज किए गए हैं।
एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम का दावा
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों ने MBBS की सरकारी सीटों पर कोटे का लाभ लेने के लिए आवेदन किया था। उनके दस्तावेजों में यह दावा किया गया कि वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी धर्मवीर वर्मा की नातिन हैं।
काउंसलिंग के दौरान चिकित्सा शिक्षा निदेशालय को दस्तावेजों में समानता और अन्य तथ्यों को लेकर संदेह हुआ। इसके बाद संबंधित प्रमाणपत्रों की वास्तविकता जांचने के लिए जिला प्रशासन से सत्यापन कराया गया।
रिकॉर्ड में नहीं मिला स्वतंत्रता सेनानी का नाम
जिला प्रशासन की जांच में कथित तौर पर धर्मवीर वर्मा नाम के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का रिकॉर्ड नहीं मिला। अधिकारियों ने पुराने राजस्व और कलक्ट्रेट रिकॉर्ड की जांच की। रिपोर्ट के मुताबिक, 1 फरवरी 2005 से उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नाम का कोई स्वतंत्रता सेनानी दर्ज नहीं मिला।
इसके बाद संबंधित अभ्यर्थियों द्वारा लगाए गए प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल खड़े हो गए। प्रशासन ने दस्तावेजों को संदिग्ध मानते हुए आगे की कार्रवाई की।
एक अभ्यर्थी का पता भी निकला गलत
जांच के दौरान एक अन्य अभ्यर्थी के आवेदन में दर्ज पते को लेकर भी गड़बड़ी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक, आवेदन में मोथरोवाला का पता दर्ज था। जब पटवारी सत्यापन के लिए वहां पहुंचे तो बताए गए पते पर संबंधित अभ्यर्थी या उसका परिवार नहीं मिला।
स्थानीय लोगों से पूछताछ में भी उस नाम के व्यक्ति के वहां रहने की पुष्टि नहीं हुई। आवेदन में दर्ज मोबाइल नंबर भी कथित तौर पर संबंधित अभ्यर्थी के परिवार से जुड़ा नहीं पाया गया।
दस्तावेजों में मिलीं कई गड़बड़ियां
प्रशासनिक सत्यापन के दौरान केवल एक मामले में ही नहीं, बल्कि कई दस्तावेजों में अलग-अलग तरह की विसंगतियां सामने आने की बात कही गई है। जांच रिपोर्ट उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह के सामने पहुंचने के बाद 10 सितंबर को संबंधित प्रमाणपत्रों को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।
वहीं, मामले से जुड़े दस्तावेजों की जांच के आधार पर क्लेमनटाउन और रायपुर थाने में संबंधित पटवारियों की ओर से शिकायत दर्ज कराई गई है।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय ने किया था अलर्ट
चिकित्सा शिक्षा निदेशक डॉ. आशुतोष सयाना के मुताबिक, काउंसलिंग के दौरान कुछ प्रमाणपत्र संदिग्ध नजर आए थे। इसके बाद विभाग ने जिला प्रशासन को इसकी जानकारी दी और दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया।
उन्होंने कहा कि NEET काउंसलिंग के दूसरे चरण में भी दस्तावेजों की जांच पर विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि किसी अपात्र अभ्यर्थी को गलत दस्तावेजों के आधार पर सरकारी मेडिकल सीट का लाभ न मिल सके।
जांच के बाद ही पूरी तस्वीर होगी साफ
सरकारी MBBS सीटों पर दाखिले की प्रक्रिया में दस्तावेजों की वैधता बेहद महत्वपूर्ण होती है। देहरादून में सामने आए इस मामले में प्रशासन ने संदिग्ध प्रमाणपत्रों को रद्द कर दिया है और पुलिस स्तर पर भी कार्रवाई की गई है।
अब मामले की आगे की जांच में यह स्पष्ट होगा कि कथित फर्जी दस्तावेज किसने तैयार किए, इनके पीछे कौन लोग शामिल थे और इन्हें NEET काउंसलिंग में इस्तेमाल करने की कोशिश कैसे की गई। फिलहाल विभाग ने काउंसलिंग के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर निगरानी बढ़ा दी है।