Dhami government completes 4 years, now the big question is – how strong is its report card among the public?
Pushkar Dhami Government 4 Years: उत्तराखंड की राजनीति में आज का दिन अहम माना जा रहा है, क्योंकि मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर लिया है और अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर रही है। 23 March 2022 को शपथ लेने के बाद से अब तक धामी सरकार ने कई ऐसे फैसले लिए, जिन्होंने न केवल राज्य की राजनीति को प्रभावित किया बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी पहचान को मजबूत किया।
इन चार वर्षों में सरकार ने Uniform Civil Code (UCC), anti-cheating law, anti-conversion law, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई, अवैध धार्मिक ढांचों पर सख्ती और Madarsa Board से जुड़े फैसलों के जरिए खुद को एक strong decision-making government के रूप में पेश किया। यही वजह है कि धामी सरकार का यह कार्यकाल केवल प्रशासनिक उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसने एक अलग political narrative भी तैयार किया।
धामी सरकार की सबसे ज्यादा चर्चा जिस फैसले को लेकर हुई, उसमें UCC implementation प्रमुख रहा। उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जहां Uniform Civil Code लागू किया गया। इसके अलावा राज्य में strict anti-copying law लागू कर भर्ती परीक्षाओं में नकल के खिलाफ सख्त संदेश देने की कोशिश की गई। सरकार का दावा है कि इस कदम के बाद युवाओं में भरोसा बढ़ा और हजारों सरकारी नौकरियों का रास्ता खुला।
मुख्यमंत्री धामी ने अपने कार्यकाल में कई बार ऐसे फैसले भी लिए, जिन्हें सरकार ने public sentiment based decision-making के तौर पर पेश किया। UKSSSC paper leak case के बाद बेरोजगार युवाओं के आंदोलन ने जब जोर पकड़ा, तब धामी खुद धरना स्थल पहुंचे। इसके बाद न केवल परीक्षा रद्द की गई, बल्कि मामले की CBI inquiry कराने का निर्णय भी लिया गया। इसी तरह Ankita Bhandari case में भी सरकार ने जनभावना को देखते हुए केंद्रीय जांच एजेंसी से जांच की सिफारिश की।
धामी सरकार की छवि एक ऐसे नेतृत्व की भी बनी, जो विवादास्पद या कठिन माने जाने वाले फैसलों से पीछे नहीं हटता। illegal encroachment removal, illegal mazars action, और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया। सरकार का दावा है कि 12,000 acre से ज्यादा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। इसी क्रम में Madarsa Board dissolution और Uttarakhand State Minority Education Authority के गठन का फैसला भी काफी चर्चा में रहा।
महिला सशक्तीकरण और सामाजिक योजनाओं के मोर्चे पर भी सरकार ने कई उपलब्धियों का दावा किया है। सरकार के अनुसार, women empowerment schemes के तहत लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम हुआ और बड़ी संख्या में Lakhpati Didi तैयार की गईं। वहीं, Agniveer reservation के तहत सरकारी नौकरियों में 10% horizontal reservation का फैसला भी सरकार के प्रमुख निर्णयों में गिना जा रहा है।
आर्थिक और निवेश के क्षेत्र में भी धामी सरकार अपने चार साल के कार्यकाल को उपलब्धियों से भरा मानती है। सरकार के मुताबिक, राज्य में investment summit और अलग-अलग प्रयासों के जरिए 3.56 lakh crore rupees के MoU हुए, जिनमें से बड़ी राशि के प्रस्तावों पर काम भी शुरू हो चुका है। Ease of Doing Business और startup ranking में उत्तराखंड की बेहतर स्थिति को भी सरकार अपनी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है।
पर्यटन, ऊर्जा और digital governance के क्षेत्र में भी सरकार ने सकारात्मक तस्वीर पेश की है। दावा किया गया है कि वर्ष 2025 में राज्य में 6 crore से अधिक tourists पहुंचे, जिससे tourism economy को बड़ा बल मिला। वहीं, solar energy capacity एक गीगावाट के पार पहुंचने को green growth की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। दूसरी ओर, Apuni Sarkar portal के जरिए सैकड़ों सेवाओं को online उपलब्ध कराकर digital governance को भी आगे बढ़ाया गया।
शिक्षा और खेल के मोर्चे पर भी धामी सरकार ने अपनी उपलब्धियां गिनाई हैं। उत्तराखंड को National Education Policy 2020 लागू करने वाला पहला राज्य बताया गया है। साथ ही, पहली बार National Games की मेजबानी और राज्य के खिलाड़ियों द्वारा रिकॉर्ड पदक जीतना भी उपलब्धियों की सूची में शामिल किया गया है। सरकार इसे sports infrastructure growth और युवा प्रतिभाओं के उभार से जोड़कर देख रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चार साल पूरे होने पर कहा कि राज्य की जनता का विश्वास ही सरकार को लगातार काम करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने यह भी कहा कि Prime Minister Narendra Modi के नेतृत्व और केंद्र सरकार के सहयोग से उत्तराखंड ने विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां हासिल की हैं। धामी ने Viksit Bharat 2047 के लक्ष्य में उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका की भी बात कही।
धामी ने यह भी दोहराया कि उनके लिए Sanatan values और उत्तराखंड की cultural identity का सम्मान सर्वोपरि है। उनका कहना है कि देवभूमि की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से छेड़छाड़ की कोशिशों के खिलाफ सरकार सख्ती से कार्रवाई करती रही है। साथ ही उन्होंने विपक्ष, खासकर कांग्रेस, पर निशाना साधते हुए दावा किया कि जनता अब तुष्टिकरण और पुराने राजनीतिक तरीकों को नकार चुकी है।
आपदा प्रबंधन के मोर्चे पर भी धामी सरकार ने खुद को सक्रिय प्रशासन के रूप में प्रस्तुत किया है। Silkyara tunnel rescue operation को सरकार अपनी बड़ी उपलब्धियों में गिनती है। इस जटिल rescue mission ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींचा था। सरकार का कहना है कि आपदा की घड़ी में राहत और बचाव कार्यों को तेज, संवेदनशील और प्रभावी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए गए।
कुल मिलाकर, Pushkar Dhami 4 years report card में सरकार ने खुद को एक ऐसी प्रशासनिक और राजनीतिक इकाई के रूप में स्थापित करने की कोशिश की है, जिसने strong governance, quick decision-making, cultural positioning, investment push, और public welfare को साथ लेकर चलने का दावा किया है। अब आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा कि इन फैसलों और उपलब्धियों का असर 2027 के विधानसभा चुनाव तक जनता के बीच किस रूप में दिखाई देता है।