Dayara Bugyal Missing Case: MBA student seen in CCTV footage mysteriously goes missing during trek
उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में Dayara Bugyal Trek के दौरान लापता हुई 24 वर्षीय MBA छात्रा बबीता पांडेय के मामले में नया मोड़ सामने आया है। छात्रा के गायब होने से कुछ घंटे पहले का CCTV फुटेज सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों के लिए कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फुटेज में बबीता पांडेय अपने दो दोस्तों हरमनपाल सिंह और हरमनप्रीत सिंह के साथ एक काले रंग की SUV के पास दिखाई दे रही हैं। वीडियो में वाहन का डिक्की खुला हुआ नजर आता है और उनके साथी उसमें रखे सामान को निकालते दिखाई देते हैं। बताया जा रहा है कि यह फुटेज 29 मई का है और उत्तरकाशी के रैथल गांव स्थित उस Homestay का है, जहां तीनों ट्रेक शुरू करने से पहले रुके थे।
नैनीताल की रहने वाली बबीता पांडेय अपने दोनों दोस्तों के साथ उत्तराखंड भ्रमण पर निकली थीं। यात्रा के दौरान उन्होंने देहरादून, हर्षिल, गंगोत्री और आसपास के पर्यटन स्थलों का दौरा किया। 28 मई को तीनों रैथल गांव पहुंचे और वहां रात्रि विश्राम किया। अगले दिन उन्होंने प्रसिद्ध Dayara Bugyal Trek की शुरुआत की और Goi Base Camp में ठहरे।
जानकारी के अनुसार, 29 मई की रात कैंप में रहने के दौरान बबीता अचानक लापता हो गईं। परिवार की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने Missing Person Case दर्ज कर व्यापक Search Operation शुरू कर दिया। मामले में उनके दोनों साथियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है।
छात्रा की तलाश के लिए Army, ITBP, SDRF, NDRF, Police, Forest Department और Disaster Management की संयुक्त टीम लगातार अभियान चला रही है। करीब 150 सदस्यीय टीम जंगलों, ट्रेकिंग रूट्स, गुफाओं और आसपास के क्षेत्रों में Search and Rescue Operation चला रही है। खोज अभियान में Drone Surveillance और Sniffer Dogs की भी मदद ली जा रही है। इसके अलावा Goi Camp के पास स्थित झील में विशेष Diving Team भी तलाशी अभियान में जुटी हुई है।
जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, जिस Trekking Agency ने बबीता और उनके साथियों को Dayara Bugyal Trek पर भेजा था, उसका पंजीकरण फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ट्रेक के लिए इस्तेमाल किया गया Permit फर्जी था।
उत्तरकाशी जिला पर्यटन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आधिकारिक पोर्टल “Explore Uttarkashi” पर बबीता और उनके साथियों के नाम से कोई वैध Digital Permit जारी नहीं किया गया था। जांच में यह भी पाया गया कि ट्रेकिंग एजेंसी ने पुराने Permit का उपयोग करते हुए नाम बदलकर उन्हें ट्रेक पर भेजा था। QR Code स्कैन करने पर भी पुराने यात्रियों का डेटा सामने आया, जिससे शुरुआत में रेस्क्यू टीमों को सही जानकारी जुटाने में दिक्कत हुई।
फिलहाल पुलिस, पर्यटन विभाग और अन्य एजेंसियां मामले की हर पहलू से जांच कर रही हैं। बबीता पांडेय की तलाश जारी है और प्रशासन ने आम लोगों से भी किसी भी उपयोगी जानकारी को तुरंत साझा करने की अपील की है।