CM Vijay's bold move! Cost of government projects reduced by up to 30% through the open tender system.
तमिलनाडु में सरकारी ठेकों को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, CM Vijay सरकार ने Open Tender System लागू करने के बाद सरकारी परियोजनाओं की लागत में उल्लेखनीय कमी आने का दावा किया है। कहा जा रहा है कि नई व्यवस्था के तहत कई Government Contracts में ठेकेदारों ने अनुमानित लागत से 25 से 30 प्रतिशत तक कम दरों पर बोली लगाई है, जिससे सरकारी खजाने को बचत हुई है।
Open Tender System क्यों चर्चा में है?
मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद विजय ने राज्य की वित्तीय स्थिति में पारदर्शिता लाने की बात कही थी। इसी क्रम में सरकार ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों के लिए पुराने Fixed Tender System की जगह Competitive Bidding यानी खुली निविदा प्रणाली लागू करने का फैसला किया।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य सरकारी ठेकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, पारदर्शिता सुनिश्चित करना और अनावश्यक खर्च को कम करना है।
सड़क परियोजनाओं में दिखा असर
रिपोर्ट के अनुसार, Greater Chennai Corporation (GCC) की कई सड़क मरम्मत परियोजनाओं में ठेकेदारों ने सरकारी अनुमान से काफी कम दरों पर बोली लगाई।
बताया गया है कि पहले जहां कई ठेके अनुमानित लागत से अधिक कीमत पर दिए जाते थे, वहीं नई व्यवस्था में अधिकांश बोलियां अनुमानित लागत से 25 से 30 प्रतिशत कम आई हैं। इससे सरकार को परियोजनाओं की लागत कम करने में मदद मिली है।
25 लाख का प्रोजेक्ट 16 लाख रुपये में
रिपोर्ट के मुताबिक, Ambattur Zone में सड़क मरम्मत की एक परियोजना की अनुमानित लागत 25 लाख रुपये थी। इस टेंडर में कुल नौ ठेकेदारों ने हिस्सा लिया।
इनमें से आठ ने अनुमानित लागत से कम बोली लगाई, जबकि एक बोली अनुमानित राशि से अधिक थी। सबसे कम बोली लगाने वाले ठेकेदार ने करीब 25.9 प्रतिशत कम दर पर परियोजना हासिल की। इसके बाद परियोजना की लागत घटकर लगभग 16 लाख रुपये रह गई, जिससे सरकार को करीब 9 लाख रुपये की बचत होने का दावा किया गया।
दूसरे इलाकों में भी कम रहीं बोलियां
रिपोर्ट में बताया गया है कि Tondiarpet क्षेत्र की एक परियोजना में भी ठेकेदारों ने अनुमानित लागत से लगभग 25 प्रतिशत कम दरों पर बोली लगाई।
वहीं Sholinganallur में कुछ परियोजनाओं के लिए बोलियां अनुमानित लागत से 36 प्रतिशत तक कम दर्ज की गईं। हालांकि, इतनी कम कीमतों को देखते हुए अधिकारियों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
भ्रष्टाचार पर मंत्री का आरोप
तमिलनाडु के Public Works Minister Aadhav Arjun ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के दौरान सरकारी ठेकों में नियमों का उल्लंघन, केंद्रीकृत भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी जैसी अनियमितताएं होती थीं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीति के तहत सरकारी अनुबंध बिना किसी कथित कमीशन या रिश्वत के, पूरी पारदर्शिता के साथ दिए जाएंगे।
ठेकेदारों का क्या कहना है?
Greater Chennai Contractors Association के अध्यक्ष Rama Rao का दावा है कि पहले कई परियोजनाएं अनुमानित लागत से लगभग 10 प्रतिशत अधिक कीमत पर मंजूर होती थीं। उनका कहना है कि नई व्यवस्था से यह सवाल भी उठा है कि पहले परियोजनाओं का अनुमानित बजट वास्तविक लागत से काफी अधिक क्यों रखा जाता था।
क्या पूरे देश के लिए बन सकता है मॉडल?
वित्तीय और प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यदि Open Tender System पारदर्शी तरीके से लागू होता है और निर्माण की गुणवत्ता भी बनी रहती है, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि कम कीमत पर ठेके मिलने के बाद सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय पर काम पूरा कराना और निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना होगी। ऐसे में इस मॉडल की सफलता का वास्तविक आकलन आने वाले समय में परियोजनाओं के परिणामों से होगा।
नोट: इस खबर में किए गए दावे (जैसे मुख्यमंत्री विजय द्वारा लागू की गई नीतियां, बचत के आंकड़े और भ्रष्टाचार के आरोप) संबंधित रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों पर आधारित हैं। इन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है।