Are Mamata Banerjee's troubles mounting? Both the Election Commission and the High Court are active in the TMC dispute.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में Trinamool Congress (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। पार्टी के नियंत्रण, Party Symbol और संगठन पर अधिकार को लेकर दोनों गुट आमने-सामने हैं। इस विवाद पर Election Commission of India (ECI) ने सुनवाई शुरू कर दी है और दोनों पक्षों से अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है।
आयोग ने Mamata Banerjee और बागी गुट के नेता Ritabrata Banerjee को नोटिस जारी कर 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
Election Commission ने क्या मांगा जवाब?
चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से संगठनात्मक चुनाव, राष्ट्रीय कार्यसमिति की वैधता और पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं (Authorized Signatories) से जुड़े दावों पर विस्तृत जवाब मांगा है। आयोग अब यह भी जांच करेगा कि पार्टी के संगठन और नेतृत्व पर कानूनी रूप से किस गुट का दावा मजबूत है।
बागी गुट ने ठोका पार्टी और Symbol पर दावा
नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग मुख्यालय में Ritabrata Banerjee की अगुआई में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar और आयोग की पूर्ण पीठ से मुलाकात की।
बैठक के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में टीएमसी के दो-तिहाई से अधिक विधायक, पूर्व मंत्री, नगर निकायों के कई पार्षद और जिला परिषदों के सदस्य उनके साथ हैं।
उन्होंने कहा कि जब बहुमत उनके पक्ष में है तो अलग से पार्टी के नाम और ‘जोड़ा फूल’ Symbol पर दावा करने की जरूरत नहीं पड़ती, क्योंकि असली तृणमूल कांग्रेस वही गुट है।
बागी गुट के अध्यक्ष Arup Roy ने बताया कि उन्होंने आयोग को 22 जून को हुई राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के सभी प्रस्ताव और कानूनी दस्तावेज सौंप दिए हैं। इसी बैठक में ममता बनर्जी को पार्टी अध्यक्ष पद से हटाने का दावा किया गया था।
ममता गुट ने बताया पूरी प्रक्रिया अवैध
दूसरी ओर, ममता बनर्जी के समर्थक इस पूरी प्रक्रिया को गैरकानूनी बता रहे हैं।
टीएमसी सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता Kalyan Banerjee ने कहा कि उन्होंने पहले ही चुनाव आयोग के समक्ष Caveat दाखिल कर दी है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय कार्यसमिति को ममता बनर्जी की मंजूरी के बिना किसी भी तरह का फैसला लेने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने बागी गुट पर निशाना साधते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस की पहचान ममता बनर्जी से है और पार्टी का अधिकांश संगठन तथा कार्यकर्ता आज भी उनके साथ खड़ा है। उनके मुताबिक, बागी नेताओं का दावा ऐसा है जैसे कोई किरायेदार खुद को मकान का मालिक घोषित कर दे।
Party Fund पर भी छिड़ी कानूनी लड़ाई
सिर्फ पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ही नहीं, बल्कि Party Fund को लेकर भी विवाद गहरा गया है।
Calcutta High Court में ममता गुट ने एक निजी बैंक द्वारा टीएमसी के तीन बैंक खातों को फ्रीज किए जाने के खिलाफ याचिका दाखिल की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने बैंक और जांच एजेंसियों से कई अहम सवाल पूछे।
High Court ने बैंक से मांगा जवाब
न्यायमूर्ति Sougata Bhattacharyya की एकल पीठ ने बैंक अधिकारियों को 7 जुलाई तक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने खातों में मौजूद कुल राशि की जानकारी भी मांगी है।
इसके साथ ही संबंधित पुलिस विभाग को भी उसी तारीख तक अपनी जांच रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया गया है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह सवाल भी उठाया कि एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद बैंक खातों को इतनी जल्दबाजी में फ्रीज करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। हालांकि, फिलहाल कोर्ट ने ममता गुट को कोई अंतरिम राहत देने से इनकार किया है।
बैंक अकाउंट क्यों हुए फ्रीज?
जानकारी के मुताबिक, जून महीने में बागी विधायकों की शिकायत के बाद पुलिस के निर्देश पर एक निजी बैंक ने टीएमसी के तीन खातों को फ्रीज कर दिया था। इन खातों में पार्टी का करोड़ों रुपये का फंड जमा बताया जा रहा है।
अब किस पर टिकी हैं नजरें?
अब पूरे मामले में निगाहें Election Commission और Calcutta High Court की आगामी सुनवाई पर हैं। आयोग का फैसला यह तय कर सकता है कि TMC का आधिकारिक संगठन, Party Symbol ‘जोड़ा फूल’ और अन्य अधिकार किस गुट को मिलेंगे। वहीं बैंक खातों से जुड़े मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई भी राजनीतिक और कानूनी रूप से बेहद अहम मानी जा रही है।