Bill to remove PM-CM from office on custody for more than 30 days stuck for now, not agreed in JPC
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्रियों को 30 दिन से अधिक न्यायिक हिरासत में रहने की स्थिति में स्वतः पद से हटाने का प्रस्ताव रखने वाला Constitution Amendment Bill फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाया है। इस विधेयक की समीक्षा कर रही Joint Parliamentary Committee (JPC) की बैठक में रिपोर्ट को मंजूरी नहीं मिल सकी। समिति के भीतर विभिन्न सिफारिशों को लेकर मतभेद सामने आने के बाद रिपोर्ट पर आगे और चर्चा करने का फैसला किया गया।
JPC बैठक में क्यों नहीं पास हो सकी रिपोर्ट?
सूत्रों के अनुसार, समिति की बैठक में पहले गृह मंत्रालय और Ministry of Law and Justice के अधिकारियों ने विधेयक से जुड़े कानूनी और संवैधानिक पहलुओं पर प्रस्तुति दी। इसके बाद समिति ने दो महत्वपूर्ण और तीन सामान्य सिफारिशों पर चर्चा की।
जब अंतिम रिपोर्ट को मंजूरी देने की प्रक्रिया शुरू हुई तो कुछ सदस्यों ने मांग की कि प्रत्येक सिफारिश पर अलग-अलग Voting कराई जाए। इसी मुद्दे पर मतभेद उभरने के कारण रिपोर्ट को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका और बैठक बिना निर्णय के समाप्त हुई।
Monsoon Session में सरकार की प्राथमिकता नहीं यह Bill
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सोमवार से शुरू होने वाले Parliament Monsoon Session में यह विधेयक सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है। सरकार का फोकस फिलहाल दो अध्यादेशों को कानून का रूप देने और तीन नए विधेयकों को पारित कराने पर रहेगा।
Delimitation और Women’s Reservation पर रहेगा जोर
सूत्रों का कहना है कि सरकार आगामी सत्र में Delimitation और Women’s Reservation को लागू करने से जुड़े Constitution Amendment Bill को आगे बढ़ाने की तैयारी में है। बताया जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर Congress और Samajwadi Party को छोड़कर अधिकांश विपक्षी दलों का समर्थन मिलने की संभावना है।
प्रस्तावित बदलावों के तहत Lok Sabha और राज्य विधानसभाओं की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत तक वृद्धि करने का प्रावधान भी शामिल हो सकता है।
अभी नहीं हुआ अंतिम फैसला
हालांकि, PM-CM Removal Bill पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। समिति की रिपोर्ट लंबित रहने के कारण विधेयक पर आगे की प्रक्रिया भी फिलहाल रुकी हुई है। अब इस पर अगली बैठक में विस्तृत चर्चा होने की संभावना है, जिसके बाद ही रिपोर्ट को मंजूरी मिलने या उसमें संशोधन किए जाने पर फैसला होगा।