उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक में बड़ा घोटाला! गलत निवेश से 6.11 करोड़ डूबे, 15 करोड़ पर संकट

 जनता की मेहनत की कमाई को दांव पर लगाते हुए उत्तराखंड राज्य सहकारी बैंक के मैनेजमेंट ने 2019 में एक ऐसा गलत Financial Investment कर डाला, जिसके नतीजे अब सामने आ रहे हैं। बैंक ने दावा किया था कि 15 करोड़ के निवेश से 30 करोड़ से ज्यादा की Return on Investment (ROI) मिलेगी, लेकिन असल में यह रकम घटकर मात्र 8.78 करोड़ रह गई।

अब तक 6.11 करोड़ की जनता की मूल रकम और 11 लाख रुपये कंपनी चार्जेज पूरी तरह डूब चुके हैं। इस घोटाले में संभावित मुनाफा भी हाथ से निकल गया है।

कहां फंसी रकम, और क्यों उठे सवाल?

बैंक ने 2019 में एक ऐसी Financially Weak Company में 15 करोड़ रुपये लगाए, जिसकी मार्केट साख पहले से संदिग्ध थी। इस निर्णय पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि बैंक मैनेजमेंट ने जानबूझकर डूबती कंपनी में निवेश क्यों किया?

अब रजिस्ट्रार को-ऑपरेटिव सोनिका को इस घोटाले की जांच सौंपी गई है। सचिव सहकारिता दिलीप जावलकर ने निर्देश दिए हैं कि Cooperative Societies Act के तहत समयबद्ध जांच की जाए और रिपोर्ट शासन को सौंपी जाए।

कई बार दबाई गई जांच, अब मचा हड़कंप

इस घोटाले की जांच पहले भी कई बार शुरू हुई, लेकिन हर बार राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक संरक्षण के चलते दबा दी गई। इस बार सचिव स्तर से सख्ती के आदेश दिए गए हैं, जिससे पूर्व एमडी, जीएम और बोर्ड मेंबरों में हड़कंप मच गया है।

Cooperative Bank बना घोटालों का पर्याय

राज्य सहकारी बैंक अक्सर Corruption Allegations का केंद्र बना रहता है:

  • महंगे गिफ्ट और बजट की बंदरबांट

  • बिना प्रक्रिया के चीनी मिल, शराब और रियल एस्टेट को लोन

  • Resort Projects में फंडिंग

  • बिना मंजूरी के बैकडोर भर्तियां और फिर उनका वेतन बढ़ाना

Registrar Approval के बिना इन नियुक्तियों को भी अवैध माना गया है, फिर भी बैंक बोर्ड ने उन्हें न केवल वेतन बढ़ाया बल्कि Permanent करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी।

आंकड़ों में घोटाले की तस्वीर:

विवरण

राशि (₹ में)

निवेश की गई मूल राशि

15 करोड़

वर्तमान मूल्य

8.78 करोड़

डूबी रकम

6.11 करोड़

कंपनी चार्जेज

11 लाख

अनुमानित लाभ का नुकसान

लगभग 15 करोड़

क्या होगी कार्रवाई?

बैंक के इस वित्तीय अनियमितता की जांच अगर पारदर्शी हुई तो कई रसूखदार अधिकारियों और पूर्व मैनेजमेंट पर FIR तक की नौबत आ सकती है। शासन स्तर पर कार्रवाई की निगरानी की जा रही है।