भोजशाला विवाद पहुंचा Supreme Court, अब क्या बदलेगा धार का इतिहास?

मध्य प्रदेश के धार स्थित चर्चित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद विवाद अब Supreme Court पहुंच गया है। Muslim पक्ष की ओर से हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है। इस मामले ने एक बार फिर देशभर में धार्मिक और ऐतिहासिक बहस को तेज कर दिया है।

दरअसल, Madhya Pradesh High Court ने हाल ही में अपने अहम फैसले में कहा था कि भोजशाला परिसर का मूल धार्मिक स्वरूप मंदिर का है और यह स्थल मां सरस्वती यानी मां वाग्देवी का प्राचीन मंदिर माना जाता है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि यह एक protected monument है, जिसका ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बेहद बड़ा है।

Muslim पक्ष ने Supreme Court में दाखिल की अपील

भोजशाला मामले में काजी मोइनुद्दीन की ओर से Supreme Court में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में High Court के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि फैसले के कई पहलुओं पर पुनर्विचार की जरूरत है। अब इस मामले पर देश की सर्वोच्च अदालत में सुनवाई होने की संभावना है।

इस कानूनी लड़ाई के बाद Bhojshala Case एक बार फिर national headlines में आ गया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो चुकी है।

High Court ने भोजशाला को बताया मां सरस्वती का मंदिर

15 मई को दिए गए अपने फैसले में हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा था कि ऐतिहासिक दस्तावेज, archaeological evidence और उपलब्ध साहित्य यह साबित करते हैं कि भोजशाला कभी संस्कृत शिक्षा का बड़ा केंद्र था। अदालत ने माना कि यहां मां सरस्वती का मंदिर मौजूद था।

कोर्ट ने अपने फैसले में Ayodhya Verdict में तय सिद्धांतों का भी उल्लेख किया और कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है। अदालत ने केंद्र सरकार और Archaeological Survey of India (ASI) को परिसर के प्रशासन और प्रबंधन पर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।

ASI की 2003 वाली व्यवस्था भी रद्द

High Court ने ASI के साल 2003 के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया, जिसके तहत Muslim पक्ष को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि अगर जरूरत हो तो Muslim पक्ष राज्य सरकार से मस्जिद निर्माण के लिए alternative land की मांग कर सकता है।

यह फैसला हिंदू संगठनों और स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है।

721 साल बाद शुक्रवार को हुई महाआरती

High Court के फैसले के बाद शुक्रवार को पहली बार भोजशाला परिसर में मां वाग्देवी की महाआरती और विशेष पूजा का आयोजन किया गया। बताया जा रहा है कि करीब 721 वर्षों के बाद शुक्रवार के दिन पूरे परिसर में मां वाग्देवी के जयकारे गूंजे।

धार और आसपास के क्षेत्रों में इसे लेकर उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे।

London से वापस लाई जा सकती है मां सरस्वती की प्रतिमा

मामले की सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष ने ब्रिटिश काल में London ले जाई गई मां सरस्वती की प्रतिमा को वापस भारत लाने की मांग भी उठाई थी। इस पर High Court ने कहा कि केंद्र सरकार इस मांग पर representation के तौर पर विचार कर सकती है।

यह मुद्दा भी अब तेजी से चर्चा में है और कई धार्मिक संगठनों ने प्रतिमा वापसी की मांग तेज कर दी है।

ASI Survey Report में क्या कहा गया था?

साल 2024 में High Court के आदेश पर ASI Survey कराया गया था। ASI की रिपोर्ट में कहा गया कि मौजूदा ढांचा पुराने मंदिरों के अवशेषों और वास्तुशिल्पीय हिस्सों से निर्मित प्रतीत होता है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद अदालत ने स्थल निरीक्षण भी किया था। इसके बाद विस्तृत सुनवाई के पश्चात कोर्ट ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

Bhojshala Case क्यों बना National Issue?

Bhojshala-Kamal Maula Mosque Dispute सिर्फ धार्मिक विवाद नहीं बल्कि इतिहास, संस्कृति, पुरातत्व और आस्था से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। Supreme Court में याचिका दाखिल होने के बाद अब पूरे देश की नजरें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

आने वाले दिनों में Supreme Court का रुख इस लंबे समय से चल रहे विवाद की दिशा तय कर सकता है।