After a 12-year legal battle, the verdict is finalized—teacher service is recognized as continuing, but salary is not.
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दुराचार के आरोप में बर्खास्त किए गए बागेश्वर जिले के शिक्षक राजू थापा के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जारी बर्खास्तगी आदेश को अवैध ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि राजू थापा की सेवा समाप्ति का आधार उनकी आपराधिक दोष सिद्धि थी, लेकिन जब हाईकोर्ट ने 2013 में ही उन्हें बरी कर दिया था, तो बर्खास्तगी सही नहीं ठहराई जा सकती। हालांकि, चूंकि अब वह सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए उन्हें नौकरी पर दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा।
सेवा मानी जाएगी जारी, लेकिन नहीं मिलेगा वेतन
कोर्ट ने कहा कि:
उनकी सेवा को 16 दिसंबर 2010 से लेकर रिटायरमेंट की तारीख तक वैध माना जाएगा।
इस अवधि को पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों की गणना में शामिल किया जाएगा।
लेकिन वेतन का भुगतान नहीं होगा क्योंकि उन्होंने वास्तविक सेवा नहीं की।
मामला क्या था?
राजू थापा 2 नवंबर 2004 को बागेश्वर के अपर प्राइमरी स्कूल गैराड़ डुग में सहायक शिक्षक के पद पर नियुक्त हुए थे।
उन पर आईटी एक्ट और IPC की धारा 376 के अंतर्गत दुराचार का मामला दर्ज हुआ।
ट्रायल कोर्ट ने 22 सितंबर 2011 को दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा सुनाई।
इसी आधार पर 01 फरवरी 2012 को उनकी नौकरी समाप्त कर दी गई।
हाईकोर्ट में अपील और राहत
राजू थापा ने दोष सिद्धि को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
25 जुलाई 2013 को हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का फैसला रद्द करते हुए उन्हें बरी कर दिया।
हालांकि, राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर की, जो अभी लंबित है।
एकल न्यायाधीश ने याचिका खारिज की, लेकिन डिवीजन बेंच ने बदला फैसला
पहले एकल न्यायाधीश ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
लेकिन न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ ने इस आधार को गलत माना।
बेंच ने स्पष्ट कहा:
“जब दोष सिद्धि रद्द हो चुकी है, तो बर्खास्तगी का आधार भी समाप्त हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका लंबित होना, सेवा समाप्ति को वैध नहीं बनाता।”
विभागीय जांच न होने पर भी उठाए सवाल
कोर्ट ने यह भी कहा कि:
सेवा समाप्ति जैसी सजा केवल विधिवत विभागीय जांच के बाद ही दी जा सकती है।
इस मामले में कोई departmental inquiry नहीं की गई, इसलिए सेवा समाप्ति स्वतः अवैध थी।