A confluence of Sanskrit and AI! Uttarakhand government presents a new vision to DD News.
उत्तराखंड सरकार के संस्कृत शिक्षा, कार्यक्रम क्रियान्वयन एवं जनगणना सचिव दीपक कुमार ने नई दिल्ली स्थित DD News Headquarters में डीडी न्यूज़ की महानिदेशिका एवं सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की वरिष्ठ भारतीय सूचना सेवा अधिकारी ममता वर्मा से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान उत्तराखंड में संस्कृत भाषा के संरक्षण, संवर्धन और आधुनिक माध्यमों से उसके व्यापक प्रचार-प्रसार को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में संस्कृत संरक्षण पर जोर
बैठक के दौरान दीपक कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार संस्कृत भाषा को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री अपने सार्वजनिक कार्यक्रमों में संस्कृत श्लोकों का उल्लेख कर युवाओं को भारतीय संस्कृति, भाषा और ज्ञान परंपरा से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं।
13 संस्कृत ग्राम बने सांस्कृतिक पहचान का केंद्र
उन्होंने बताया कि राज्य के प्रत्येक जनपद में एक-एक Sanskrit Gram विकसित किया गया है। कुल 13 संस्कृत ग्रामों के माध्यम से संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इन गांवों में भविष्य में Sanskrit Film Festival का आयोजन भी किया जाएगा, जिसका उद्घाटन लिथुआनिया की राजदूत डायना मिकेविचिएने करेंगी। इस अवसर पर वे संस्कृत के विद्यार्थियों से संवाद भी करेंगी।
संस्कृत और आधुनिक तकनीक का होगा समन्वय
दीपक कुमार ने कहा कि आज गुरुकुलों और संस्कृत संस्थानों के विद्यार्थी केवल वेद, उपनिषद और शास्त्रीय ग्रंथों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि Artificial Intelligence (AI) और आधुनिक Digital Technology का भी प्रभावी उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत का विशाल ज्ञान भंडार भविष्य की वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
डीडी न्यूज़ से की विशेष कार्यक्रम शुरू करने की अपील
बैठक के दौरान उन्होंने डीडी न्यूज़ से अनुरोध किया कि देशभर के गुरुकुलों, संस्कृत विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यापीठों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मंच देने के लिए विशेष कार्यक्रम शुरू किए जाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि योग्य संस्कृत विद्यार्थियों को News Anchor, Reporter, Editor, Producer और Content Creator जैसे क्षेत्रों में अवसर दिए जाएं, जिससे संस्कृत पत्रकारिता और मीडिया को नई दिशा मिल सके।
संस्कृत संस्थानों की भूमिका पर भी हुई चर्चा
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय का श्री रघुनाथ कीर्ति परिसर (देवप्रयाग), संस्कृत शिक्षा निदेशालय और उत्तराखंड संस्कृत संस्थान सहित कई संस्थान राज्य में वैदिक ज्ञान और संस्कृत शिक्षा के विस्तार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
आचार्य दिनेश चंद्र जोशी के योगदान का किया उल्लेख
दीपक कुमार ने बताया कि उत्तराखंड में संस्कृत को द्वितीय राजभाषा का दर्जा दिलाने में आचार्य दिनेश चंद्र जोशी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके सम्मान में हाल ही में डाक विभाग ने स्मारक डाक टिकट जारी किया है। साथ ही भारत सरकार 11 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2027 तक उनकी जन्मशती वर्ष के अवसर पर देशभर में विभिन्न शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर रही है।
संस्कृत विद्वानों की तैयार होगी डिजिटल निर्देशिका
उन्होंने जानकारी दी कि उत्तराखंड सरकार राज्य के संस्कृत विद्वानों की एक व्यापक Digital Directory तैयार कर रही है। इसमें वरिष्ठ और शतायु संस्कृत विद्वानों को भी शामिल किया जाएगा, ताकि उनके योगदान को संरक्षित किया जा सके और नई पीढ़ी तक भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत पहुंचाई जा सके।