Mirwaiz Umar Farooq removed Hurriyat chairman post in Valley after warning from authorities
कश्मीर के प्रमुख धार्मिक नेता और separatist figure Mirwaiz Umar Farooq ने अपने X (formerly Twitter) bio से ‘Hurriyat Chairman’ का टाइटल हटा दिया है। Mirwaiz का कहना है कि यह फैसला उन्होंने authorities के दबाव और एक official warning के बाद लिया। इस कदम के बाद Kashmir Valley में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
Mirwaiz Umar Farooq को शुक्रवार को Srinagar की Jama Masjid में जुमे की नमाज़ अदा करने से भी रोका गया। बाद में उन्होंने X पर पोस्ट कर बताया कि पिछले कुछ समय से उनसे लगातार कहा जा रहा था कि वे अपने सोशल मीडिया अकाउंट से Hurriyat से जुड़ा पदनाम हटा दें।
Mirwaiz के मुताबिक, अधिकारियों ने यह तर्क दिया कि All Parties Hurriyat Conference (APHC) से जुड़ी सभी घटक इकाइयों, जिनमें उनकी अगुवाई वाली Awami Action Committee भी शामिल है, को UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत प्रतिबंधित किया जा चुका है। ऐसे में Hurriyat को एक banned organisation माना जाता है और अगर bio में बदलाव नहीं किया गया तो उनका X handle takedown किया जा सकता है।
Mirwaiz ने इस स्थिति को “Hobson’s choice” बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब public space और freedom of expression पहले से ही सीमित हैं, सोशल मीडिया उनके लिए लोगों तक अपनी बात पहुंचाने और Kashmir issue पर विचार साझा करने का एक अहम माध्यम है।
गौरतलब है कि Mirwaiz Umar Farooq 1993 में Hurriyat Conference के पहले अध्यक्ष बने थे। उस दौर में APHC कई separatist political groups, traders’ bodies और civil society organisations का एक साझा मंच था, जो कश्मीर को disputed territory बताते हुए United Nations resolutions on Kashmir के कार्यान्वयन की मांग करता रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर PDP chief Mehbooba Mufti ने कहा कि bio से टाइटल हटाना Mirwaiz का निजी फैसला है, लेकिन Hurriyat केवल एक संगठन नहीं बल्कि एक idea है, जो कश्मीर के लोगों की alienation को दर्शाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कश्मीर में सब कुछ सामान्य है तो फिर रोज़ाना raids क्यों हो रही हैं।
PDP विधायक Waheed-ur-Rehmaan Parra ने Mirwaiz के फैसले की तुलना Treaty of Hudaybiyyah से की और इसे समझदारी व शांति की दिशा में उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस निर्णय को Mirwaiz के खिलाफ इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और शांति को प्राथमिकता देना कमजोरी नहीं बल्कि नेतृत्व की पहचान है।
वहीं, National Conference (NC) के नेता और विधायक Tanvir Sadiq ने सरकार से इस मामले की समीक्षा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि Mirwaiz एक सम्मानित religious scholar हैं और अगर वे दबाव की बात कह रहे हैं तो इस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।
दूसरी ओर, पूर्व separatist नेता और अब राजनेता Sajad Lone ने Mirwaiz की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और प्रोटोकॉल के बदले किया गया समझौता, Hudaybiyyah peace treaty से तुलना योग्य नहीं है और कश्मीर की राजनीति में धार्मिक संदर्भों का जरूरत से ज़्यादा इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।