“हजारों एकड़ Forest Land गायब, Supreme Court ने Uttarakhand Government को क्यों लगाई फटकार?”

उत्तराखंड में forest land encroachment को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। हजारों एकड़ वन भूमि पर अवैध कब्ज़े के मामले में अदालत ने कहा कि राज्य सरकार और उसके अधिकारी इस पूरे घटनाक्रम के दौरान “mute spectator” बने रहे। सुप्रीम कोर्ट ने इस गंभीर मामले में suo motu cognizance लेते हुए सुनवाई शुरू की है।

यह मामला उत्तराखंड की निवासी Anita Kandwal द्वारा दाखिल याचिका से जुड़ा है, जिसमें राज्य में बड़े पैमाने पर जंगल की जमीन पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया था।

Forest Land पर कब्ज़ा: Supreme Court की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान Chief Justice Surya Kant और Justice Joymalya Bagchi की vacation bench ने कहा कि यह बेहद हैरान करने वाली स्थिति है कि राज्य की आंखों के सामने forest land पर कब्ज़ा होता रहा और प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार और संबंधित अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वहन करने में पूरी तरह विफल रहे हैं।

Fact Finding Committee गठित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड के Chief Secretary और Principal Chief Conservator of Forests (PCCF) को निर्देश दिया है कि वे तत्काल एक Fact Finding Committee का गठन करें।
यह कमेटी राज्य में वन भूमि पर हुए सभी अतिक्रमणों की जांच करेगी और अपनी detailed report अदालत में पेश करेगी।

Third Party Rights और Construction पर रोक

कोर्ट ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा कि:

इस जमीन पर third party rights नहीं बनाए जाएंगे

किसी भी तरह का construction activity पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी

यह निर्देश तब तक लागू रहेगा जब तक अदालत इस मामले पर अंतिम फैसला नहीं सुना देती।

खाली Forest Land पर Forest Department का कब्ज़ा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन स्थानों पर आवासीय निर्माण नहीं है, वहां की vacant encroached forest land को तुरंत Forest Department के कब्ज़े में लिया जाए।
हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले से बने रिहायशी घरों के मामले में अलग से जांच की जाएगी।

अगली सुनवाई की तारीख तय

कोर्ट ने छुट्टियों के बाद सोमवार को इस मामले की अगली सुनवाई तय की है।
यह केस उत्तराखंड में जंगलों की जमीन पर हुए large-scale illegal encroachment से जुड़ा एक अहम पर्यावरणीय मामला माना जा रहा है।