New list of State Law Officers released, know who became Chief and Deputy Advocate General
Uttarakhand High Court ने एक अहम फैसला सुनाते हुए देहरादून की निचली अदालत में चल रहे धोखाधड़ी के आपराधिक मामले को पूरी तरह रद्द कर दिया। अदालत ने कहा कि यह मामला स्पष्ट रूप से “Misuse of Legal Process” यानी कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है, जहां राज्य प्राधिकरण पहले दिए गए अपने ही बयानों से पीछे हटते दिखाई दे रहे हैं।
न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने मामले में जारी Charge-Sheet और Summons Order दोनों को रद्द कर दिया।
Court में रखे गए तर्क
याचिकाकर्ता रणजीत सिंह की ओर से कहा गया कि IPC धारा 420 (Cheating) लागू होने के लिए शुरुआत से ही “Dishonest Intention” यानी बेईमानी का इरादा होना जरूरी है। अदालत ने इस तर्क को स्वीकार करते हुए पाया कि जिस समय विवादित संपत्ति से जुड़े पहले Lease Transaction हुए थे, उस समय रणजीत सिंह की उम्र सिर्फ दो वर्ष थी।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि इतनी कम उम्र में कोई व्यक्ति Criminal Intention बना ही नहीं सकता। इस आधार पर अदालत ने उन्हें Doli Incapax Principle के तहत संरक्षित माना, यानी कानून के अनुसार वह दोषी ठहराए जाने योग्य नहीं थे।
राज्य की दलीलें अदालत में विरोधाभासी
High Court ने कहा कि इस संपत्ति विवाद पर पहले से ही लंबे समय से Civil Cases चल रहे हैं। इन सभी मामलों में स्वयं राज्य और SSP देहरादून ने माना है कि:
रणजीत सिंह के पूर्वज इस संपत्ति के मालिक थे
सरकार केवल किरायेदार (Tenant) थी
लेकिन जब अदालतों ने फैसला याचिकाकर्ता के पक्ष में दिया और सरकार को बेदखल करने का आदेश दिया, तब उसी सरकार ने उलट बयान देकर एक False FIR दर्ज कराई।
राज्य प्राधिकरण ने दावा किया था कि संपत्ति एक मुस्लिम परिवार की थी, जो विदेश चला गया और इसलिए जमीन Escheat Law के अंतर्गत सरकार की हो गई।
High Court की कड़ी टिप्पणी
अदालत ने इस विरोधाभास को गंभीरता से लेते हुए कहा:
पुलिस और राज्य प्रशासन इस मामले में “Judge in their own case” की तरह व्यवहार कर रहे हैं।
यह मामला कानून की प्रक्रिया का दुर्भावनापूर्ण उपयोग है।
इसलिए अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) Section 482 का प्रयोग करते हुए पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
LT Teachers Promotion Case की सुनवाई
अदालत ने प्रदेश के LT Teachers और Lecturers (Pravakta) की पदोन्नति से जुड़े मामलों पर दायर कई याचिकाओं पर भी एक साथ सुनवाई की।
सरकार की ओर से बताया गया कि नई Seniority List जारी हो चुकी है।
कुछ याचिकाकर्ताओं ने कहा कि उनका चयन वर्ष 2005 में Direct Recruitment से हुआ था, इसलिए उन्हें वरिष्ठता मिलनी चाहिए।
वहीं अन्य शिक्षकों ने दावा किया कि वे Promotion Channel से आए हैं, इसलिए उनकी वरिष्ठता मान्य होनी चाहिए।
अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अगली सुनवाई की तिथि 4 दिसंबर तय की।