Deadline for voter list revision in Uttar Pradesh extended, objections can be raised till March 6
प्रयागराज में चल रहे Special Intensive Revision (SIR) के दौरान एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इलाहाबाद उत्तर विधानसभा की voter list में वर्ष 2003 की एक एंट्री ने प्रशासन और BLO की टीम को हैरान कर दिया है। इस सूची के अनुसार, मकान नंबर 7 में कुल 302 लोग रह रहे थे। अब SIR प्रक्रिया के तहत BLO इन सभी 302 लोगों की तलाश में जुटे हैं, लेकिन अब तक इस पते पर इनमें से एक भी व्यक्ति नहीं मिला है।
बीएलओ का कहना है कि सामान्य स्थिति में किसी घर में 4-5 लोग रहते हैं, बड़े संयुक्त परिवार में 10-20 लोग भी मिल सकते हैं। लेकिन इतनी बड़ी संख्या में मतदाता एक ही पते पर सूचीबद्ध होना संदेह पैदा करता है। यह मामला मतदाता सूची की विश्वसनीयता और सत्यता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
यह केवल एक मामला नहीं है। इसी विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 271 में मकान नंबर 27 पर 131 वोटर दर्ज हैं, जबकि वास्तव में उस स्थान पर अब एक अपार्टमेंट है। 22 साल पुरानी सूची में दर्ज कई पते अब या तो बदल चुके हैं, या पूरी तरह से मिट चुके हैं। शहर का नक्शा और जनसंख्या संरचना दोनों बदल चुके हैं, लेकिन उस समय दर्ज डाटा अब प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है।
कुछ और मामलों में voter list में पते “झुग्गी-झोपड़ी” लिखे गए हैं, और उनमें 518 तक नाम दर्ज हैं। BLO के अनुसार, किसी भी झोपड़ी में इतने लोग रहना संभव नहीं है। सूची में दर्ज ऐसे पते ढूंढना मुश्किल हो गया है, क्योंकि आज वहां न झुग्गी बची है न लोग।
इसके अलावा voter list में कुछ पते “हनुमान”, “बजरंग” जैसे नामों से दर्ज हैं, जहां एक-एक एंट्री में 50 से 100 लोगों के नाम जोड़े गए हैं। इससे संदेह गहरा रहा है कि 2003 voter list में बड़े स्तर पर गलत, फर्जी या बिना सत्यापन के नाम जोड़े गए थे।
प्रशासन की सख्ती
प्रयागराज के जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी ERO और ARO को निर्देश दिया है कि वे केवल BLO पर निर्भर न रहें। अधिकारियों को खुद फील्ड में जाकर सत्यापन करने का आदेश दिया गया है।
उन्होंने बताया कि अब तक जमा हुए verification forms का 50 प्रतिशत भी digitalize नहीं हो पाया है, जबकि अंतिम तिथि नजदीक है। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि यह कार्य समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा होना चाहिए।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण?
अगर ये डेटा सही नहीं है, तो यह election transparency और democracy process के लिए खतरा है।
voter database अपडेट न होने से fake voting और booth manipulation की आशंका बढ़ सकती है।
इस जांच से यह स्पष्ट होगा कि क्या यह सिर्फ गलत रिकॉर्ड है या फिर यह फर्जी वोटर रजिस्ट्रीकरण का बड़ा मामला है।