क्यों NDA में जाने वालों की हुई ‘धन वर्षा’ और महागठबंधन में गए नेताओं का सूखा?

Bihar Assembly Election 2025 के नतीजों ने एक दिलचस्प ट्रेंड को सामने रखा है। चुनाव से पहले NDA (BJP–JDU Alliance) में शामिल होने वाले अधिकतर नेताओं ने शानदार जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन (RJD–Congress–Left) में जाने वाले उम्मीदवारों को भारी निराशा मिली।
दल बदलने वालों में कई चेहरे चमके, लेकिन कुछ बड़े नामों को जनता ने साफ तौर पर नकार दिया।

NDA में आने वाले नेताओं की किस्मत खुली, ज्यादातर ने जीत दर्ज की

चुनाव से पहले BJP और JDU का दामन थामने वाले नेताओं को जनता ने खुलकर समर्थन दिया।
JDU में शामिल होकर जीतने वाले प्रमुख नाम:

चेतन आनंद

विभा देवी

जमा खान

अनंत सिंह

वहीं, JDU में आए राजकुमार सिंह और छोटे लाल राय को हार का सामना करना पड़ा।
निर्दलीय से JDU में आए सुमित कुमार सिंह भी जीत नहीं पाए।
BJP में आए और जीतने वाले नेता:

सिद्धार्थ सौरभ

संगीता कुमारी

केदार सिंह

इसके अलावा, कांग्रेस छोड़कर BJP में आने वाले और LJP(R) के टिकट पर लड़ने वाले मुरारी गौतम ने भी चुनाव जीत लिया।
यह पैटर्न दर्शाता है कि NDA में एंट्री लेने से ground-level support और organizational backing दोनों मिले, जिसका लाभ उम्मीदवारों को मिला।

महागठबंधन में जाने वालों की वापसी—ज्यादातर उम्मीदवार पटखनी खा गए
दूसरी तरफ, चुनाव से ठीक पहले RJD या Congress जॉइन करने वाले नेताओं का प्रदर्शन बेहद खराब रहा।
RJD का दामन थामने वाले जिन नेताओं को हार का सामना करना पड़ा:

डॉ. संजीव कुमार

कौशल यादव

पूर्णिमा यादव

सूरजभान सिंह (इनकी पत्नी वीणा देवी चुनाव हारीं)

रेणु कुशवाहा

संतोष कुशवाहा

बृजकिशोर बिंद

JDU छोड़कर RJD में आए राहुल शर्मा एक मात्र चेहरा रहे जिन्होंने जीत दर्ज की।
वहीं, BJP छोड़कर Congress गए अनिल कुमार भी चुनाव हार गए।
हालांकि, JDU से RJD में आए बोगो सिंह (मटिहानी) इस ट्रेंड के अपवाद रहे, और उन्होंने जीत हासिल की।

Political Trend: NDA में एंट्री बना Winning Formula?

इस चुनाव ने साफ कर दिया कि:

Pro-NDA Wave का असर पूरे राज्य में दिखा

BJP–JDU गठबंधन में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को चुनावी जमीन पर बढ़त मिली

महागठबंधन में आने वालों को भारी एंटी-इंकम्बेंसी और कमजोर नेटवर्क का सामना करना पड़ा

बागियों (Rebels) ने भी कई सीटों पर समीकरण बिगाड़े

यह परिणाम बताता है कि वोटर mood पूरी तरह से NDA के पक्ष में था, और विपक्ष में शामिल होने का फैसला कई नेताओं के लिए विनाशकारी साबित हुआ।