61 candidates, only 6 wins – what factors are responsible for Congress's biggest defeat?
Bihar Assembly Election 2025 Results में आई NDA की प्रचंड लहर ने कांग्रेस को उसके पारंपरिक प्रभाव वाले इलाकों में भी भारी नुकसान पहुंचाया।
मगध, शाहाबाद, मिथिला, सारण और अंग जैसे क्षेत्रों में कांग्रेस एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि सीमांचल और चंपारण की कुछ सीटों ने पार्टी की इज्जत बचाने का काम किया।
2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार सिर्फ 6 सीटों पर सिमट गई। इतना ही नहीं, पार्टी के अधिकांश दिग्गज उम्मीदवार अपनी सीट भी नहीं बचा पाए।
किन क्षेत्रों से Congress पूरी तरह गायब?
इस बार कांग्रेस जिन बड़े भौगोलिक इलाकों में कोई उपस्थिति दर्ज नहीं करा सकी, वे हैं:
मगध (Magadh Region)
शाहाबाद (Shahabad Belt)
मिथिला-अंग क्षेत्र (Mithila–Ang Region)
सारण (Saran Zone)
इन सभी इलाकों में पार्टी के खाते में शून्य सीटें आईं।
सीमांचल और चंपारण बने Congress का Oxygen Zone
भारी हार के बीच राहत की बात यह रही कि:
सीमांचल (Seemanchal) में कांग्रेस ने 4 सीटें जीतीं
फारबिसगंज
किशनगंज
मनिहारी
अररिया
चंपारण (Champaran) में पार्टी को 2 सीटें मिलीं
वाल्मीकिनगर
चनपटिया
यही छह सीटें कांग्रेस के लिए इस चुनाव में बची हुई पूंजी साबित हुईं।
कौन जीता, कौन हारा?
इस बार कांग्रेस के सिर्फ दो मौजूदा विधायक अपनी सीट बचाने में कामयाब हुए:
अबिदुर रहमान – अररिया
मनोहर प्रसाद सिंह – मनिहारी
दूसरी ओर, कई बड़े चेहरे पराजित हो गए:
प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम
विधायक दल के नेता शकील अहमद खान
पूर्व मंत्री अवधेश सिंह
कुल मिलाकर कांग्रेस ने इस चुनाव में 61 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन प्रदर्शन उम्मीद के बिल्कुल विपरीत रहा।
Congress की हार के पीछे क्या कारण रहे?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कांग्रेस की हार के पीछे कई प्रमुख वजहें रहीं:
1. Alliance Mismanagement
महागठबंधन (INDIA Bloc) में समन्वय की कमी और poor alliance strategy कांग्रेस के लिए बड़ा झटका साबित हुई।
2. Vote-Chori Narrative Fail
पार्टी द्वारा लगातार उठाया गया vote-theft narrative मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सका।
3. Gathbandhan Conflicts
लगभग 10 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों के सामने महागठबंधन के घटक दलों के ही प्रत्याशी खड़े थे, जिससे वोट खुलकर बंटे।
4. Ticket Distribution Crisis
टिकट बंटवारे को लेकर नाराज़गी गहरी थी।
कई सीटों पर:
बाहरी नेताओं को टिकट दिए गए
स्थानीय कार्यकर्ता नाराज़ हुए
कई वरिष्ठ नेता चुनाव से पहले ही निष्क्रिय हो गए
इस अंदरूनी कलह (internal sabotage) का सीधा नुकसान पार्टी को उठाना पड़ा।
कांग्रेस में शुरू हुआ मंथन
इतिहास की सबसे बड़ी हारों में से एक झेलने के बाद अब कांग्रेस के बड़े नेता post-poll review और strategy reset में जुट गए हैं।
कहा जा रहा है कि पार्टी आगामी महीनों में Bihar unit में बड़े बदलाव कर सकती है।