Uttarakhand to ban online drug sales after children die from cough syrup
देहरादून: देशभर में खांसी की सिरप से जुड़ी बच्चों की मौतों के मामलों के बाद उत्तराखंड सरकार अब ऑनलाइन दवाओं की बिक्री पर बैन लगाने जा रही है। यह प्रतिबंध इस महीने के अंत तक लागू किया जा सकता है।
राज्य के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इस संबंध में केंद्रीय सरकार को औपचारिक सिफारिश भेजी है। विभाग का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री की निगरानी करना बेहद मुश्किल है और इससे नियामकीय नियंत्रण में कई खामियां पैदा हो रही हैं।
खांसी की सिरप से बच्चों की मौत के बाद सख्ती
यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है जब केंद्र सरकार ने देशभर में कुछ कंपनियों की खांसी की सिरप से हुई बच्चों की मौतों की खबरों के बाद ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट में संशोधन की प्रक्रिया शुरू की है। उत्तराखंड सरकार ने कहा है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री और होम डिलीवरी पर सख्त नियंत्रण बेहद जरूरी है।
कई राज्यों ने दी सिफारिश
उत्तराखंड समेत कई राज्यों ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह प्रावधान केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए जा रहे नए ड्रग रेगुलेशन कानून में शामिल किया जा सकता है।
FDA अधिकारी का बयान
एफडीए के अतिरिक्त आयुक्त ताजबर सिंह जगी ने बुधवार को इसकी पुष्टि करते हुए कहा,
“उत्तराखंड सहित कई राज्यों ने ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। यह प्रावधान दवा विनियमन के लिए तैयार किए जा रहे नए केंद्रीय कानून में शामिल किया जा सकता है।”
ऑनलाइन दवा बिक्री पर निगरानी मुश्किल
सूत्रों के मुताबिक, प्रतिबंध इसलिए भी जरूरी समझा जा रहा है क्योंकि ऑनलाइन दवा लेनदेन का पता लगाना और नियंत्रित करना कठिन है। अधिकारी बताते हैं कि कौन व्यक्ति कितनी मात्रा में कौन सी दवा किस ऑनलाइन स्टोर से खरीद रहा है — इसकी जानकारी आसानी से छिपाई जा सकती है, जिससे गड़बड़ी और दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है।
राज्य में 20 हजार से अधिक मेडिकल स्टोर
वर्तमान में उत्तराखंड में 20,000 से अधिक पंजीकृत मेडिकल स्टोर हैं, जिनमें से कई ऑनलाइन बिक्री और होम डिलीवरी में भी शामिल हैं। यह प्रथा कोविड-19 महामारी के दौरान तेजी से बढ़ी थी।
एफडीए अधिकारियों के अनुसार, राज्य में ऑनलाइन दवा व्यापार का मूल्य करोड़ों रुपये में है और विभाग अब इस बढ़ते सेक्टर के सटीक रिकॉर्ड तैयार करने में जुटा है।