Justice for Ladli: हल्द्वानी में जनसभा, सड़क पर महिलाओं का धरना और सरकार पर दबाव

हल्द्वानी (Haldwani, Uttarakhand) में लाडली की निर्मम हत्या (Brutal Murder of Ladli) के खिलाफ जनसभा और प्रदर्शन (Public Protest / UK Protest) में लोगों ने गहरा आक्रोश जताया। लाडली के ताऊ ने कहा, “हमारी बच्ची पिथौरागढ़ से चलकर हंसी-खुशी हल्द्वानी आई थी, लेकिन अब आपको हमें उसकी लाश दी। उसके शरीर पर सिगरेट के दाग आज भी हमारे दिल को झकझोरते हैं। अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हर उत्तराखंड की बेटी का यही हाल होगा।”

जनसभा में लोगों ने “बेटी हम शर्मिंदा हैं, तेरी कातिल जिंदा हैं” जैसे नारे लगाकर न्याय की मांग (Justice for Ladli) को जोर-शोर से उठाया।

उत्तराखंड में वकीलों की कमी पर सवाल

लाडली के ताऊ ने सवाल उठाया कि जब उनकी बेटी की हत्या हुई थी, तब कांग्रेस सरकार को झुकना पड़ा था। उन्होंने बताया कि हरीश रावत ने मदद के लिए तीन लाख रुपये का चेक भेजा था, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या उत्तराखंड में कोई काबिल वकील (Qualified Lawyer in Uttarakhand) नहीं है, जिससे मध्यप्रदेश से केस लड़ने के लिए वकील लाने की जरूरत पड़े।

उनका कहना था कि राज्य में सरकारी वकील बनाने के लिए परीक्षा होनी चाहिए, ताकि सेटिंग-गेटिंग और नेताओं के परिवार की वजह से वकील नियुक्ति प्रभावित न हो।

सरकार पर आंदोलन तोड़ने का आरोप

लाडली के ताऊ ने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन तोड़ने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि सत्ताधारी पार्टी का कोई नेता बेटी के समर्थन में नहीं आया।

पुलिस और जनता के बीच तनाव

भीड़ को नियंत्रित करने के प्रयास में पुलिस और खुफिया एजेंसियों के हाथ-पाँव फूल गए। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर धरना दिया और जुलूस निकालने की तैयारी की। पहाड़ी आर्मी के संयोजक हरीश रावत ने गेट को फांदकर बाहर निकलकर पुलिस को मजबूर कर दिया। इस दौरान धक्का-मुक्की भी हुई।

कांग्रेसी नेताओं का समर्थन

जनसभा और जुलूस के दौरान कांग्रेस और भाजपा दोनों को आड़े हाथों लिया गया। बाद में कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश और ललित जोशी भी मौके पर आए और परिवार के साथ खड़े होने का आश्वासन दिया। सिटी मजिस्ट्रेट ने बताया कि पुलिस ने पुनर्विचार याचिका (Review Petition) दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है।

मामला क्या है

नवंबर 2014 में पिथौरागढ़ से हल्द्वानी आई छह साल की लाडली अचानक लापता हो गई। छह दिन बाद उसका शव गौला नदी से बरामद हुआ। जांच में पता चला कि टॉफी के लालच में मासूम को अगवा किया गया और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म हुआ। मुख्य आरोपी अख्तर अली को मार्च 2016 में फांसी की सजा दी गई। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।

अन्य न्याय की मांग

लोगों ने पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, चंपावत और हल्द्वानी से बड़ी संख्या में प्रदर्शन किया। पोस्टर और रिव्यू पिटीशन लेकर पहुंचे लोग अंकिता भंडारी और योगा ट्रेनर के लिए भी न्याय की मांग कर रहे थे।

बयान:

“जिसे हाईकोर्ट ने फांसी दी उसे सुप्रीम कोर्ट ने बरी कर दिया। यह दुखद है।” – गोविंद दिगारी

“हम हार नहीं मानेंगे। दिल्ली तक भी जाएंगे।” – श्वेता माहरा

“लाडली को न्याय मिलना चाहिए ताकि कोई और बच्ची खतरे में न आए।” – इंदर आर्या

“अभियुक्त को फांसी होनी चाहिए। हमारे छोटे बच्चे भी सुरक्षित रहें।” – राकेश कनवाल

“अगर इसी तरह आरोपी छूटते रहे तो न्याय व्यवस्था पर विश्वास उठ जाएगा।” – राकेश जोशी

“लाडली पूरी कुमाऊं की बेटी थी, उसे जल्द न्याय मिलना चाहिए।” – पवन पहाड़ी