Manjubala's passion for teaching in a hill school earned her the National Teacher Award
चम्पावत जिले के बाराकोट ब्लॉक के च्यूरानी गांव की प्रधानाध्यापिका मंजूबाला (Manjubala) ने अपने समर्पण और नवाचार के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार (National Teacher Award) जीता। सड़क से ढाई किलोमीटर दूर पहाड़ी इलाके में स्थित सरकारी स्कूल में बच्चों को अंग्रेजी (English education) और अन्य विषयों में दक्ष बनाने के लिए उनका प्रयास सराहनीय है। मंजूबाला ने स्कूल को जिले का पहला अंग्रेजी माध्यम विद्यालय (English medium school) बनाया और बच्चों के लिए इवनिंग क्लासेज (Evening Classes) की भी शुरुआत की।
मंजूबाला 2005 से च्यूरानी प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत हैं। वे न केवल कक्षा में पढ़ाती हैं, बल्कि स्काउट और गाइड (Scout & Guide) कार्यक्रमों में भी बच्चों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करती हैं। उनके कई छात्रों का चयन सेना और एसएसबी (SSB) में हो चुका है, जबकि कई बच्चे राजीव गांधी स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय (Jawahar Navodaya Vidyalaya) और कस्तूरबा गांधी स्कूल (Kasturba Gandhi School) में भी सफल हुए हैं।
मंजूबाला को इससे पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें टीचर ऑफ द ईयर (MHRD, 2020), आयरन लेडी (2023), शैलेश मटियानी पुरस्कार (2021) और एनएचआरओ से सोशल वर्कर और शिक्षक सारथी शामिल हैं। उनका उद्देश्य बच्चों में न केवल किताबी ज्ञान बल्कि जीवन में उपयोगी सीख भी देना है।
च्यूरानी एक आपदा प्रभावित (disaster-affected) क्षेत्र है। 2022 की आपदा के बाद गांव से कई परिवार लोहाघाट और तड़ाग गांव में पलायन कर चुके हैं। वर्तमान में स्कूल में केवल छह बच्चे पढ़ रहे हैं, जिन्हें पहुंचने के लिए ढाई किलोमीटर की पहाड़ी चढ़ाई करनी पड़ती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education, Government of India) ने सोमवार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2025 की सूची जारी की। देश के 45 शिक्षकों में से मंजूबाला उत्तराखंड की इकलौती शिक्षिका हैं। पुरस्कार वितरण समारोह 5 सितंबर को दिल्ली विज्ञान भवन (Science Bhawan, Delhi) में आयोजित किया जाएगा।