Philippines earthquake: At least 69 killed; PM Modi expresses condolences
लोकसभा में ऑपरेशन सिंदूर पर दो दिन चली चर्चा का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जबरदस्त जवाब दिया। उन्होंने सिर्फ एक वाक्य में विपक्ष की तमाम आलोचनाओं को चुप कराने की कोशिश की: “मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हुआ हूं… और जिन्हें भारत का पक्ष नहीं दिखता, उन्हें आईना दिखाने के लिए खड़ा हुआ हूं। यह वाक्य सुनने में जितना साधारण था, उतना ही राजनीतिक रूप से तीखा और रणनीतिक तौर पर मारक निकला। पीएम मोदी ने इसे कहकर साफ कर दिया कि वे सिर्फ एक पार्टी नहीं बल्कि पूरे भारत के प्रतिनिधि के तौर पर संसद में खड़े हैं।
“ये भारत के विजयोत्सव का सत्र है”
पीएम मोदी ने संसद को संबोधित करते हुए कहा कि यह सत्र भारत के शौर्य, सेना की वीरता और 140 करोड़ भारतीयों की इच्छाशक्ति का उत्सव है। उन्होंने Operation Sindoor को भारत की नई सैन्य रणनीति का प्रतीक बताया, जिसमें पाकिस्तान के आतंकी अड्डों को निशाना बनाया गया। “ये विजयोत्सव दुश्मन को मिट्टी में मिलाने का है, सिंदूर की सौगंध पूरी करने का है।”
एक वाक्य, विपक्ष के हर सवाल का जवाब
विपक्ष लगातार सीज़फायर के पीछे की मंशा, खुफिया विफलता और ऑपरेशन के नतीजों को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहा था। मगर पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत में ही यह स्पष्ट कर दिया कि “मैं भारत का पक्ष रखने के लिए खड़ा हूं…”
यह लाइन सीधा संदेश थी –यह लड़ाई पार्टी की नहीं, राष्ट्र की लड़ाई है।
सेना को खुली छूट, पाकिस्तान में घुसकर सर्जिकल वार
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने पहली बार ऐसी रणनीति अपनाई जिसमें पाकिस्तान के अंदर स्थित आतंकियों के अड्डों पर सीधा हमला किया गया। “हमारे जवान पाकिस्तान के कोने-कोने में बने आतंकी ठिकानों तक पहुंचे और उन्हें ध्वस्त कर दिया। अब भारत अपनी शर्तों पर जवाब देता है।”
विपक्ष को दिखाया ‘आईना’
पीएम ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों को भारत की सफलता नहीं दिखती, वे विपक्ष में बैठे हैं लेकिन उनका उद्देश्य सिर्फ आलोचना करना नहीं, बल्कि भारत के गौरव को समझना भी होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि, अगर किसी को भारत का पक्ष नहीं दिख रहा, तो मैं यहां उन्हें आईना दिखाने आया हूं।
राजनीतिक संदेश: जवाबदेही और नेतृत्व दोनों का दावा
इस वाक्य के जरिए पीएम मोदी ने न सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर की पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली, बल्कि विपक्ष को यह भी बता दिया कि वो किसी से पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह एक मजबूत नेतृत्व का प्रदर्शन भी था, जो युद्धकालीन रणनीति और राजनीतिक जिम्मेदारी दोनों को संतुलित करता है।