Questions raised on OBC faculty recruitment in UPA regime: BJP demands accountability from Rahul Gandhi
केंद्रीय विश्वविद्यालयों (Central Universities) में अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए आरक्षित Faculty Vacancies को लेकर जारी बहस में अब BJP ने राहुल गांधी को घेर लिया है। भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस नेता से सीधे सवाल पूछा है: “UPA सरकार के कार्यकाल (2004-2014) में इन Reserved Categories के तहत कितनी Assistant Professors की नियुक्ति की गई?”
राहुल गांधी ने हाल ही में एक ट्वीट और OBC न्याय सम्मेलन के दौरान कहा था कि “केंद्रीय विश्वविद्यालयों में आरक्षित पद खाली रखना एक सोची-समझी साजिश है, ताकि बहुजन समाज को शिक्षा, नीति और रिसर्च से बाहर रखा जा सके।” उन्होंने इसे “Manuwadi Bahishkar” की संज्ञा दी और सभी रिक्तियों को तुरंत भरने की मांग की।
BJP का जवाब: “पहले अपना रिकॉर्ड दिखाएं”
BJP ने पलटवार करते हुए कांग्रेस के “Track Record” पर सवाल उठाए। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राहुल गांधी को यह बताना चाहिए कि UPA-2 के दौरान OBC वर्ग से कितने केंद्रीय मंत्री बनाए गए थे, और विश्वविद्यालयों में Faculty Level पर कितनी नियुक्तियां हुईं?
उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “राहुल गांधी ध्यान दें – प्रोफेसर बनने के लिए पहले Assistant Professor बनना पड़ता है। यह कोई कांग्रेस अध्यक्ष पद नहीं है जो जन्म से मिल जाए।” त्रिवेदी ने यह भी स्पष्ट किया कि जो प्रोफेसर आज कार्यरत हैं, वे 15–20 साल पहले Assistant Professor बने थे। इसलिए कांग्रेस को अपने समय की भर्ती प्रक्रिया का जवाब देना चाहिए।
Rahul Gandhi का Stand: “भर्ती प्रक्रिया में भेदभाव”
राहुल गांधी ने अपने भाषण में माना कि जाति जनगणना (Caste Census) न करवाना कांग्रेस की गलती थी, लेकिन अब वो उस गलती को सुधारने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने बहुजन समाज को शिक्षा में बराबरी दिलाने की बात करते हुए कहा कि “आरक्षित पद खाली रखना अन्याय है।”
BJP vs Congress की यह बहस अब Higher Education Reservations, OBC representation in academia, और Political Accountability जैसे मुद्दों को केंद्र में ला रही है। एक तरफ राहुल गांधी जहां Systemic Discrimination का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं BJP कांग्रेस से उसके दस वर्षों के रिपोर्ट कार्ड की मांग कर रही है।
क्या UPA Regime का रिकॉर्ड इस सवाल का जवाब देगा? या यह मुद्दा 2029 के लोकसभा चुनावों तक बहस का केंद्र बना रहेगा? आने वाले हफ्ते यह स्पष्ट करेगा कि कौन अपनी बात को आंकड़ों के साथ साबित कर पाता है।