SIR process begins: Political stir in Dehradun over voter list update, BLO to conduct 3 house visits
Election Commission of India (ECI) अब Bihar की तर्ज़ पर Special Intensive Revision (SIR) को national level पर लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठा चुका है। इस प्रक्रिया के तहत Voter List Revision देश के सभी राज्यों में शुरू किया जाएगा।
28 जुलाई के बाद हो सकता है अंतिम फैसला
ECI के सूत्रों के अनुसार, 28 जुलाई 2025 को Supreme Court में इस मुद्दे पर अगली सुनवाई के बाद Nationwide SIR पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। फ़िलहाल आयोग ने राज्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) को विशेष गहन पुनरीक्षण की तैयारी शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं।
क्या है SIR (Special Intensive Revision)?
Special Intensive Revision यानी मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण — एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें पुरानी मतदाता सूचियों की डिजिटली जांच, update और invalid entries को हटाने का काम होता है।
इसका उद्देश्य है:
Foreign illegal voters की पहचान
Duplicate entries हटाना
पुराने रिकॉर्ड के आधार पर authentic voter database बनाना
विपक्ष ने उठाए सवाल, सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
कुछ opposition parties और नागरिक समूहों ने SIR की प्रक्रिया को “voter disenfranchisement” बताकर इसका विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे कई eligible voters का नाम गलती से हटाया जा सकता है, जिससे उनका voting right प्रभावित होगा।
इसलिए अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और ECI की कार्यवाही न्यायिक निगरानी में होगी।
राज्यों में पुरानी मतदाता सूचियों को किया जा रहा है जारी
Delhi में आखिरी व्यापक पुनरीक्षण 2008 में हुआ था, जिसकी सूची अब CEO Delhi website पर उपलब्ध है।
Uttarakhand में यह प्रक्रिया 2006 में हुई थी, और उस साल की मतदाता सूची अब ऑनलाइन उपलब्ध है।
इन पुरानी सूचियों को ही अब base year के तौर पर उपयोग किया जा रहा है — जैसे बिहार में 2003 voter list को आधार बनाया गया है।
विधानसभा चुनावों से पहले अहम कदम
इस प्रक्रिया को शुरू करना उन राज्यों के लिए भी बेहद अहम है, जहाँ निकट भविष्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं:
Bihar में 2025
Assam, Kerala, Puducherry, Tamil Nadu, और West Bengal में 2026
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम illegal foreign immigrants की पहचान और हटाने के उद्देश्य से उठाया गया है, खासकर Bangladesh और Myanmar से जुड़े राज्यों में।
Election Commission of India का यह निर्णय देशभर की electoral rolls को ज्यादा clean, transparent और credible बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है। लेकिन विपक्ष द्वारा उठाए गए सवाल और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी इसे एक high-stakes political and legal issue बना देती है।