Pregnancy Emergency में एंबुलेंस ने छोड़ा साथ, 1500 की टैक्सी बनी सहारा

उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में Health Infrastructure की स्थिति कितनी गंभीर है, इसकी बानगी बुधवार को तब देखने को मिली जब एक गर्भवती महिला को Hospital पहुंचाने के लिए निकली दो एंबुलेंसें बीच रास्ते में ही फेल हो गईं। चौखुटिया के पास गनाई गांव की रहने वाली संजना देवी को प्रसव पीड़ा होने पर Community Health Centre (CHC) लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें Ranikhet Hospital रेफर कर दिया।

पहली 108 एंबुलेंस जैसे-तैसे उन्हें लेकर रवाना हुई, लेकिन रास्ते में Mahakaleshwar के पास तकनीकी खराबी के कारण वह वाहन बंद हो गया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद उसे ठीक किया गया और किसी तरह महिला को Dwarahat पहुंचाया गया।

द्वाराहाट से दूसरी 108 एंबुलेंस बुलाई गई, लेकिन वो भी ज्यादा दूर नहीं जा सकी और Mirai के पास खराब हो गई। महिला की स्थिति बिगड़ती जा रही थी और Emergency किसी भी वक्त गंभीर रूप ले सकती थी। आखिरकार, महिला के पति विजय कुमार ने मजबूरी में Private Taxi Hire की और 1500 रुपये में अपनी पत्नी को रानीखेत अस्पताल पहुंचाया।

परिजनों ने बताया कि पहली एंबुलेंस में Emergency Medical Technician (EMT) मौजूद था, जबकि दूसरी में EMT का अभाव था, जिससे अगर बीच रास्ते में कोई complication आती, तो हालात और खराब हो सकते थे।

यह घटना पहाड़ी इलाकों में Health Emergency Response System की बड़ी खामियों को उजागर करती है, जहां ना तो एंबुलेंस भरोसेमंद हैं और ना ही पर्याप्त मेडिकल स्टाफ। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या Remote Areas में Pregnancy Emergency जैसी गंभीर स्थितियों के लिए सरकार की कोई ठोस तैयारी है?