कैसे बनेंगे उत्तराखंड के गांव संस्कृत शिक्षा के केंद्र? जानिए सरकार की योजना

देहरादून। उत्तराखंड सरकार की नई पहल के तहत अब राज्य के संस्कृत ग्राम (Sanskrit Villages) में ग्रामीणों को प्राचीन भाषा संस्कृत में रामायण की चौपाई, गीता के श्लोक और वेदमंत्रों का उच्चारण सीखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस माह संस्कृत ग्रामों का औपचारिक शुभारंभ करेंगे।

उत्तराखंड में संस्कृत भाषा को राज्य की द्वितीय राजभाषा (Second Official Language) घोषित किया गया है। इस योजना के शुरूआती चरण में 13 जिलों के 13 गांवों को संस्कृत ग्राम के रूप में चिन्हित किया गया है, जहाँ ग्रामीणों को रोजमर्रा के बोलचाल के सामान्य शब्द संस्कृत भाषा में सिखाए जाएंगे।

राज्य सरकार ने इस परियोजना के तहत संस्कृत भाषा के प्रशिक्षकों की तैनाती कर दी है। ये प्रशिक्षक हरिद्वार की संस्कृति अकादमी और दिल्ली स्थित संस्कृत भारती संस्थान में 15-दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं। अब वे गांवों में जाकर ग्रामीणों को न केवल सामान्य वार्तालाप, बल्कि धार्मिक ग्रंथों जैसे रामायण, भगवद् गीता एवं वेदमंत्रों के संस्कृत उच्चारण का प्रशिक्षण देंगे।

संस्कृत शिक्षा सचिव दीपक गैरोला के अनुसार, सभी संस्कृत ग्रामों में पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र और अन्य सरकारी या अर्द्ध सरकारी संस्थानों के नाम संस्कृत में लिखे जाएंगे। यह पहल संस्कृत भाषा को ग्रामीण जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का उद्देश्य रखती है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि संस्कृत को न केवल एक शैक्षणिक भाषा बल्कि दैनिक व्यवहार की भाषा भी बनाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ग्रामीणों में संस्कृत भाषा के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह योजना उत्तराखंड को एक संस्कृत प्रदेश (Sanskrit State) के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो राज्य की सांस्कृतिक और भाषाई विरासत को संजोने और उसे पुनर्जीवित करने का प्रयास है।