Haridwar Land Scam 2025: धामी सरकार का बड़ा एक्शन, DM, SDM और नगर आयुक्त समेत 12 अधिकारी सस्पेंड

उत्तराखंड के हरिद्वार में हुए बहुचर्चित भूमि घोटाले (Haridwar Land Scam) में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। इस घोटाले में पहली बार किसी मामले में जिलाधिकारी (DM), उप जिलाधिकारी (SDM) और नगर निगम आयुक्त को एक साथ सस्पेंड किया गया है। कुल मिलाकर 12 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई है, जिनमें दो IAS और एक PCS अधिकारी भी शामिल हैं।

क्या है हरिद्वार भूमि घोटाला?

यह मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा एक जमीन की खरीद से जुड़ा है, जिसकी वास्तविक कीमत करीब 14 करोड़ रुपए आंकी गई थी, लेकिन इसे 54 करोड़ रुपए में खरीदा गया। जांच में पाया गया कि इस खरीद प्रक्रिया में न केवल नियमों की अनदेखी हुई, बल्कि लैंड पुलिंग कमेटी (Land Pooling Committee) की मंजूरी भी नहीं ली गई। जमीन कूड़े के ढेर के पास थी, और तत्काल इसकी कोई आवश्यकता भी नहीं थी।

कैसे हुआ खुलासा?

मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर इस घोटाले की जांच की जिम्मेदारी उत्तराखंड शासन में वरिष्ठ अधिकारी रणवीर चौहान को सौंपी गई। चौहान ने हरिद्वार जाकर मामले की गहराई से पड़ताल की और 100 पन्नों की रिपोर्ट शासन को सौंपी। इसके बाद यह कड़ा एक्शन लिया गया।

इन वरिष्ठ अधिकारियों पर गिरी गाज:

  • कर्मेंद्र सिंह (DM, हरिद्वार) – बिना लैंड कमेटी की मंजूरी के प्रशासनिक स्वीकृति देना।

  • वरुण चौधरी (पूर्व नगर आयुक्त) – नियमों को ताक पर रखकर प्रस्ताव पास करना और वितीय अनियमितता में संलिप्तता।

  • अजयवीर सिंह (SDM) – नियमों को दरकिनार करते हुए केवल 2-3 दिन में धारा 143 की प्रक्रिया पूरी करना और अपने स्टेनो से राजस्व अभिमत दिलवाना।

इन तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

अन्य निलंबित अधिकारी:

  • निकिता बिष्ट – वरिष्ठ वित्त अधिकारी

  • विक्की – वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक

  • राजेश कुमार – कानूनगो, रजिस्ट्रार

  • कमलदास – मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील

पहले से निलंबित अधिकारी:

  • रविंद्र कुमार दयाल – प्रभारी सहायक नगर आयुक्त

  • आनंद सिंह मिश्रवाण – अधिशासी अभियंता

  • लक्ष्मीकांत भट्ट – कर एवं राजस्व अधीक्षक

  • दिनेश चंद्र कांडपाल – अवर अभियंता

  • वेदपाल (सेवानिवृत्त संपत्ति लिपिक) – सेवा विस्तार समाप्त, अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ

अब विजिलेंस करेगी जांच

सरकार ने यह मामला अब विजिलेंस विभाग को सौंप दिया है। जांच में यह भी देखा जाएगा कि वितीय स्वीकृति में किन-किन स्तरों पर गड़बड़ियां की गईं और किस स्तर तक लापरवाही हुई।

मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट संदेश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस कार्रवाई को अपनी ‘Zero Tolerance Policy against Corruption’ का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि कोई भी अधिकारी कितना भी सीनियर क्यों न हो, यदि वो भ्रष्टाचार में लिप्त पाया गया, तो बख्शा नहीं जाएगा।

क्या है Section 143 और Land Pooling Committee की भूमिका?

Section 143 के तहत कृषि भूमि का उपयोग गैर-कृषि (Commercial, Residential) में बदलने की प्रक्रिया चलती है, जो आमतौर पर समय-लेवा होती है। इस मामले में SDM ने महज 2-3 दिन में प्रक्रिया पूरी कर दी, जो घोटाले का बड़ा संकेत बना।

Land Pooling Committee एक नियामक निकाय होती है जो सरकारी स्तर पर भूमि खरीद और उसके उपयोग में पारदर्शिता और नियमों का पालन सुनिश्चित करती है। इस मामले में इस कमेटी की मंजूरी के बिना ही जमीन खरीदी गई।

हरिद्वार भूमि घोटाला उत्तराखंड के प्रशासनिक इतिहास का एक बड़ा मामला बन गया है। इस पर हुई तुरंत और सख्त कार्रवाई न केवल मुख्यमंत्री धामी की ईमानदार छवि को मजबूत करती है, बल्कि राज्य में प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही का नया मापदंड भी स्थापित करती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विजिलेंस जांच में और कौन-कौन घोटाले की जद में आता है।