उत्तराखंड के 3 टीबी मुक्त जिले होंगे सम्मानित, सीएम धामी ने दिए अहम निर्देश

उत्तराखंड सरकार टीबी (Tuberculosis) मुक्त भारत अभियान को ज़मीन पर प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में तेज़ी से काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को जिलाधिकारियों के साथ वर्चुअल बैठक कर स्पष्ट किया कि जो तीन जिले सबसे पहले टीबी मुक्त होंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा।

सीएम ने सभी जिलाधिकारियों से अपने-अपने जिलों को टीबी मुक्त बनाने के लिए समर्पित भाव से जुटने का आह्वान किया है। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक जिला जनहित से जुड़े पांच नवाचारों (Innovations) पर काम करे।

TB Mukti Abhiyan: पहला लक्ष्य, पहला सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि—

“जो जिले सबसे पहले टीबी मुक्त होंगे, उन्हें राज्य सरकार की ओर से विशेष रूप से सम्मानित किया जाएगा। यह अभियान स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक बदलाव का भी प्रतीक बने।”

इस पहल का उद्देश्य है टीबी जैसे संक्रामक रोग को जड़ से खत्म करना और समाज के अंतिम छोर तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुँचाना।

5 नवाचार + पर्यावरण पर विशेष फोकस

सीएम धामी ने जिलाधिकारियों को अपने जिलों में जनहित से जुड़ी 5-5 श्रेष्ठ पहल और नवाचार लागू करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही 5 जून विश्व पर्यावरण दिवस से लेकर 25 जुलाई तक वृहद पौधारोपण अभियान चलाने को कहा।

एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों को प्राथमिकता देने और प्लास्टिक मुक्त उत्तराखंड को लेकर जनजागरूकता फैलाने के भी निर्देश दिए गए।

 मानसून अलर्ट: पहले से हो पूरी तैयारी

भारतीय मौसम विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक इस बार उत्तराखंड में औसत से अधिक वर्षा होने की संभावना है। इस पर सीएम धामी ने सभी ज़िलों को अलर्ट करते हुए कहा कि—

  • मानसून से पहले नालों की सफाई पूरी कर ली जाए

  • पेयजल, विद्युत और सड़क व्यवस्था में बाधा न आए

  • डेंगू, मलेरिया और कोरोना से बचाव की सभी तैयारियां पूरी हों

  • आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड में रहे

  • चारधाम यात्रा मार्ग पर विशेष सतर्कता बरती जाए

ट्रैफिक जाम और अतिक्रमण पर सख्ती

मुख्यमंत्री ने मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या को गंभीरता से लेते हुए अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस के अवसर पर विशेष ट्रैफिक प्रबंधन और अस्थायी पार्किंग स्थलों की भी व्यवस्था करने को कहा गया।

 एक जिला, दो उत्पाद: स्वदेशी को मिले बल

सीएम ने ‘एक जिला, दो उत्पाद’ योजना को सशक्त बनाने की बात कही और निर्देश दिए कि:

  • स्थानीय व स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता मिले

  • सरकारी कार्यक्रमों में इन्हीं उत्पादों का उपयोग किया जाए

  • आम लोगों को स्वदेशी अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए

  • उत्तराखंड सरकार का यह कदम न केवल जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है, बल्कि प्रशासनिक नवाचारों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी एक सार्थक पहल है। अब देखने वाली बात होगी कि कौन से तीन जिले सबसे पहले टीबी मुक्त होकर यह सम्मान हासिल करते हैं।