Bihar Elections 2025: राजद-कांग्रेस की ‘कभी हां, कभी न’ वाली साझेदारी का 28 साल का लेखा-जोखा, क्या इस बार साथ आएगा कोई बड़ा बदलाव?
बिहार की सियासत एक बार फिर गरमाने लगी है। वर्ष 2025 की अंतिम तिमाही में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर एनडीए और विपक्षी INDIA गठबंधन दोनों ही मोर्चे पर पूरी ताकत झोंक रहे हैं। जहां एनडीए के दल—BJP, JDU और LJP—एकजुट होकर मैदान में उतरने की बात कर रहे हैं, वहीं महागठबंधन की धुरी माने जाने वाली RJD और Congress के बीच सीटों की खींचतान की खबरें भी तैर रही हैं।
इस बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो रहा है—क्या RJD-Congress alliance इस बार कोई बड़ा उलटफेर कर पाएगा? और अगर ऐसा होता है, तो क्या इसकी जड़ें पिछले 28 वर्षों की राजनीति में छुपी हैं?
कांग्रेस: कभी बिहार की सत्ता की महारानी, अब ‘सहारे’ की मोहताज
1947 से लेकर 1990 तक बिहार में कांग्रेस का वर्चस्व रहा। श्रीकृष्ण सिंह, बिनोदानंद झा, के.बी. सहाय, दरोगा प्रसाद राय से लेकर जगन्नाथ मिश्र तक कांग्रेस के मुख्यमंत्री ही राज्य की सत्ता संभालते रहे। लेकिन 1990 का चुनाव कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हुआ।
भागलपुर दंगों और मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के लालू यादव के फैसले ने बिहार की सियासी धारा को बदल दिया। Yadav-Muslim वोट बैंक पर पकड़ मजबूत करते हुए RJD उभरकर सामने आई और कांग्रेस हाशिए पर खिसकती चली गई। कांग्रेस के पास न तो नया नेतृत्व रहा, न ही कोई ठोस सामाजिक समीकरण।
कब-कब साथ आए RJD और Congress?
राजद और कांग्रेस के बीच गठबंधन की कहानी “कभी हां, कभी न” जैसी रही है। नीचे देखिए पिछले विधानसभा चुनावों में दोनों पार्टियों की साझेदारी और उसका असर:
वर्ष |
गठबंधन |
कांग्रेस सीटें |
राजद सीटें |
रिजल्ट |
2000 |
अलग-अलग |
23 |
124 |
त्रिशंकु विधानसभा |
2005 |
अलग-अलग |
10 |
75 |
JDU-BJP गठबंधन की वापसी |
2010 |
अलग-अलग |
4 |
22 |
कांग्रेस लगभग साफ |
2015 |
साथ-साथ (महागठबंधन) |
27 |
80 |
महागठबंधन की शानदार जीत |
2020 |
साथ |
19 |
75 |
एनडीए की सरकार |