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Kedarnath Mandir Opening 2025 का पल भक्तों के लिए दिव्य अनुभूति जैसा होता है। हिमालय की ऊंची चोटियों पर स्थित यह मंदिर Lord Shiva के 12 Jyotirlinga में से एक है, जिसे धरती का स्वर्ग कहा जाता है। हर साल सर्दियों में जब मंदिर बंद होता है, तब बाबा का एक विशेष श्रृंगार किया जाता है—इसे ही Bheeshma Shringar कहा जाता है।
क्या होता है Kedarnath का Bheeshma Shringar?
जब Kedarnath Temple के कपाट नवंबर में बंद किए जाते हैं, तो उससे पहले भगवान शिव का खास श्रृंगार किया जाता है। इस प्रक्रिया में शिवलिंग पर पहले Doodh, Dahi, Honey, Panchamrit से अभिषेक किया जाता है। फिर उसे शुद्ध जल से धोया जाता है और Pure Ghee से लेपन किया जाता है।
इसके बाद भगवान को Rudraksha Mala (1 to 12 Mukhi) पहनाई जाती है। मौसमी फल, मेवा और अन्य पूजा सामग्री शिवलिंग के पास रख दी जाती है और उसे सफेद कपड़े से ढक दिया जाता है। इस श्रृंगार प्रक्रिया में लगभग 5 घंटे से अधिक का समय लगता है।
जब 6 महीने बाद खुलते हैं कपाट…
मई में जब Kedarnath Dham के पट खुलते हैं, तो सबसे पहले कर्नाटक के Veer Shaiva Lingayat Samaj के मुख्य रावल Bhimashankar Linga Shivacharya और चार अन्य सदस्य मंदिर में प्रवेश करते हैं।
फिर Bheeshma Shringar को हटाया जाता है—जो कि एक बारीक प्रक्रिया है। पहले Rudraksha की माला उतारी जाती है, फिर सफेद कपड़ा और अंत में सभी पूजा सामग्री को श्रद्धापूर्वक हटाया जाता है। इस पूरे कार्य में मात्र 25–30 मिनट का समय लगता है।
Baba का नया श्रृंगार और Ganga Snan
पुराने श्रृंगार को हटाने के बाद, शिवलिंग का दोबारा Abhishek किया जाता है। इसमें गंगा जल, दूध, दही, शहद और पंचामृत से स्नान कराया जाता है। इसके बाद फूलों और भस्म से भगवान का अलंकरण होता है।
6 महीनों तक जलती है Kedarnath की Akhand Jyoti
जब नवंबर में Kedarnath के कपाट बंद होते हैं, तो मंदिर के गर्भगृह में Akhand Jyoti प्रज्वलित की जाती है। यह ज्योति पूरे 6 महीने तक निरंतर जलती रहती है—बिना किसी मानवीय संपर्क के। इसे भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। भक्तों के लिए यह एक चमत्कार से कम नहीं होता।