“कश्मीर के आतंकवादी हमले में छत्तीसगढ़ के पर्यटकों को बचाने वाला नजाकत शाह, जानिए कैसे?”

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में मंगलवार को हुए आतंकवादी हमले के दौरान एक कश्मीरी गाइड ने अपनी जान की परवाह किए बिना छत्तीसगढ़ के 11 पर्यटकों की जान बचाई। नजाकत अहमद शाह, 28 वर्षीय कश्मीरी गाइड, ने इस हमले में बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाया और अपने परिवार को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया। यह घटना कश्मीर की बैसरन घाटी में हुई, जहाँ आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों पर गोलीबारी शुरू कर दी थी।

नजाकत शाह का योगदान: जानिए कैसे गाइड ने पर्यटकों को बचाया

नजाकत शाह, जो सर्दियों में छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के गांवों में कश्मीरी शॉल बेचने आते हैं, अपने पर्यटकों के लिए देवदूत साबित हुए। उन्होंने 17 अप्रैल को जम्मू पहुंचने के बाद, अपने समूह के साथ श्रीनगर, गुलमर्ग और सोनमर्ग जैसे दर्शनीय स्थानों की यात्रा की थी। जब आतंकवादी हमला हुआ, तब शाह और उनके समूह के सदस्य पहलगाम में थे।

बैसरन घाटी में आतंकवादी हमला: नजाकत शाह की बहादुरी

जब बैसरन घाटी में आतंकवादियों ने गोलियाँ चलानी शुरू कीं, तब शाह का पहला ध्यान अपने पर्यटकों की सुरक्षा पर था। शाह ने सबसे पहले बच्चों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने का प्रयास किया। शाह ने बताया कि वह और उनके पर्यटक टट्टू की सवारी और तस्वीरें खींचने में व्यस्त थे, तभी उन्होंने गोलीबारी की आवाज़ सुनी। शुरुआत में यह आवाज पटाखों की लगी, लेकिन फिर समझ में आया कि यह गोलियाँ थीं।

परिवार की सुरक्षा के लिए किया जोखिम भरा कदम

आतंकवादी हमले के दौरान शाह ने परिवार के बच्चों को अपने साथ लिया और घबराए हुए पर्यटकों को बाड़ के पास से बाहर निकाला। शाह ने बताया, “हमारे पास भागने का कोई रास्ता नहीं था, लेकिन मैंने बाड़ में एक छोटा सा कट देखा और सभी को सुरक्षित निकालने की कोशिश की।” शाह ने परिवार के अन्य सदस्यों को भी पहलगाम सुरक्षित पहुँचाया।

गाइड ने किया पारिवारिक कर्तव्यों को प्राथमिकता

हालाँकि शाह के अपने परिवार के सदस्य, जिनमें उनका मामा आदिल हुसैन भी शामिल थे, आतंकवादी हमले में शहीद हो गए, शाह ने पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने बताया, “मेरे मेहमानों की सुरक्षा मेरी जिम्मेदारी थी, और मैंने उनका बचाव किया। मैंने अपने परिवार के सदस्य को अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हो सका क्योंकि मुझे पहले अपने पर्यटकों को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाना था।”

सोशल मीडिया पर पर्यटकों की सराहना

हमले से बचने के बाद, शाह को उनके साहस के लिए सोशल मीडिया पर सराहा गया। अरविंद अग्रवाल, जो समूह के सदस्य थे, ने शाह के साथ अपनी और अपनी बेटी की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा, “आपने अपनी जान जोखिम में डालकर हमारी जान बचाई, हम आपके आभारी हैं।” इसी तरह, कुलदीप स्थापक ने भी शाह की बहादुरी की सराहना की और लिखा, “आपने जिस बहादुरी से हमें बचाया, वह हम कभी नहीं भूलेंगे।”

नजाकत शाह की मानवता: बचायीं जानें, दी एक नई उम्मीद

इस घटना के बाद शाह की बहादुरी ने सबको यह सिखाया कि इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना न सिर्फ अपने पर्यटकों की जान बचाई, बल्कि एक ऐसी मिसाल कायम की जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा।

नजाकत शाह की कहानी हमें यह सिखाती है कि कभी भी किसी संकट में असली बहादुरी यही है कि हम दूसरों की मदद करें, चाहे अपनी जान पर कितनी भी आ जाए।