UKSSSC Recruitment 2026: हाईकोर्ट ने नियुक्ति पत्र जारी करने पर लगाई रोक, जानिए पूरा मामला

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने UKSSSC Recruitment 2026 से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) द्वारा विभिन्न सरकारी विभागों के 751 पदों पर चल रही भर्ती प्रक्रिया में राज्य आंदोलनकारियों के वंशजों को फिलहाल Appointment Letter जारी करने पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने आयोग को नोटिस जारी करते हुए छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

शासनादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई

यह मामला हरिद्वार निवासी सक्षम चौहान द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिका में राज्य सरकार के 1 जुलाई 2026 के उस Government Order (GO) को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ऐसे अभ्यर्थियों को भी Document Verification में शामिल होने की अनुमति दी गई, जिन्होंने आवेदन के समय राज्य आंदोलनकारी आरक्षण का दावा करते हुए आवश्यक प्रमाणपत्र संलग्न नहीं किया था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता संबंधी शर्तों में बदलाव करना कानून के अनुरूप नहीं है और इससे अन्य अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।

भर्ती प्रक्रिया के बीच नियम बदलने पर उठे सवाल

याचिका में बताया गया कि 4 नवंबर 2024 को UKSSSC ने विभिन्न विभागों में 751 रिक्त पदों के लिए भर्ती विज्ञापन जारी किया था। आवेदन की अंतिम तिथि 1 नवंबर 2024 निर्धारित की गई थी। इसके बाद राज्य सरकार ने जुलाई 2026 में नया शासनादेश जारी कर उन उम्मीदवारों को भी राहत दे दी, जिन्होंने आवेदन के साथ राज्य आंदोलनकारी प्रमाणपत्र नहीं लगाया था।

याचिकाकर्ता ने Supreme Court के Tej Prakash Pathak vs Rajasthan High Court मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया कि भर्ती प्रक्रिया शुरू होने के बाद पात्रता के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने आयोग से मांगा कानूनी आधार

मामले की सुनवाई जस्टिस पंकज पुरोहित की एकल पीठ ने की। अदालत ने अपने पहले अंतरिम आदेश में राज्य सरकार और UKSSSC को निर्देश दिया था कि वे स्पष्ट करें कि 1 जुलाई 2026 का शासनादेश किस कानून या नियम के तहत जारी किया गया।

हालांकि, निर्धारित समय के भीतर राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल नहीं किया गया। वहीं आयोग ने अपने पक्ष में दलील देते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के आश्रितों पर उसी प्रकार विचार किया जा सकता है, जैसे अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों के आश्रितों पर किया जाता है।

अदालत ने आयोग की दलील नहीं मानी

हाईकोर्ट ने आयोग की इस दलील को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि अनुसूचित जाति वर्ग के उम्मीदवारों को भी संबंधित श्रेणी का लाभ लेने के लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना आवश्यक होता है। ऐसे में बिना आवश्यक दस्तावेज के आरक्षण लाभ देने का आधार स्पष्ट होना चाहिए।

कोर्ट ने आयोग की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को पर्याप्त नहीं माना और सभी पक्षों को छह सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया।

अगली सुनवाई तक रोक रहेगी जारी

अदालत ने अपने पहले दिए गए अंतरिम आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य आंदोलनकारियों के वंशजों को Appointment Letter जारी करने पर लगी रोक को अगली सुनवाई तक जारी रखने का आदेश दिया है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी, जहां अदालत राज्य सरकार और आयोग की ओर से दाखिल जवाबों पर आगे विचार करेगी।