Karnaprayag assault dispute: Four arrested Nihang Sikhs granted bail by court; case proceedings to continue.
उत्तराखंड के Karnaprayag Clash Case में गिरफ्तार चार निहंग सिखों को स्थानीय अदालत से बड़ी राहत मिली है। District and Sessions Court, Gopeshwar ने सभी आरोपियों की Bail Petition स्वीकार करते हुए उन्हें जमानत देने का आदेश दिया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि मामले की कानूनी सुनवाई और ट्रायल आगे भी जारी रहेगा।
चारों आरोपियों को मिली Bail
शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायाधीश विंध्याचल सिंह की अदालत में मामले की सुनवाई हुई। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सतविंद्र सिंह, अजय सिंह, जसनप्रीत सिंह और मनप्रीत सिंह की जमानत याचिका मंजूर कर ली।
अदालत ने आदेश दिया कि प्रत्येक आरोपी को 50-50 हजार रुपये के दो जमानती प्रस्तुत करने के बाद रिहा किया जाएगा।
एक आरोपी अस्पताल में, तीन थे जेल में
जानकारी के अनुसार, इस मामले में तीन आरोपी पुरसाड़ी जेल में न्यायिक हिरासत में बंद थे, जबकि एक आरोपी AIIMS Rishikesh में उपचाराधीन होने के साथ न्यायिक अभिरक्षा में था।
बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मोहन पंत ने अदालत में पैरवी करते हुए जमानत की मांग रखी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।
मुकदमा रहेगा जारी
कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों को जमानत मिलने का अर्थ यह नहीं है कि मामला समाप्त हो गया है। Karnaprayag Assault Case की कानूनी प्रक्रिया नियमानुसार जारी रहेगी और मामले की सुनवाई आगे भी होती रहेगी।
क्या है पूरा मामला?
16 जून को कर्णप्रयाग में स्थानीय व्यापारियों और निहंग सिखों के बीच विवाद हो गया था, जो बाद में हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि विवाद के दौरान कुछ निहंग सिखों ने तलवार से स्थानीय लोगों पर हमला किया, जिसमें कई लोग घायल हुए थे।
घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर चार निहंग सिखों को गिरफ्तार किया था।
प्रशासन पर था दबाव
घटना के बाद प्रदेश में माहौल तनावपूर्ण बना रहा। बड़ी संख्या में निहंग सिख पांवटा साहिब गुरुद्वारे में डटे रहे और उन्होंने अपने साथियों की रिहाई को लेकर प्रशासन को दो दिन का अल्टीमेटम भी दिया था।
प्रशासन लगातार कानून-व्यवस्था बनाए रखने और विवाद को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की कोशिश में जुटा रहा। अब अदालत से जमानत मिलने के बाद माना जा रहा है कि मामले में तनाव काफी हद तक कम हो सकता है, हालांकि कानूनी प्रक्रिया अपने निर्धारित क्रम में जारी रहेगी।