Amid the global oil market crisis, there is some relief news regarding fuel stock in Uttarakhand.
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब उत्तराखंड में भी साफ दिखाई देने लगा है। राज्य के कई जिलों में Petrol-Diesel Crisis गहराता जा रहा है और कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन का स्टॉक बेहद सीमित रह गया है। खासतौर पर देहरादून, अल्मोड़ा, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में लोगों को पेट्रोल और डीजल के लिए परेशानी झेलनी पड़ रही है।
तेल कंपनियों ने हाल ही में Fuel Supply Policy में बड़ा बदलाव किया है। पहले पेट्रोल पंप संचालकों को कुछ दिनों तक उधार में ईंधन मिल जाता था, लेकिन अब कंपनियां केवल Advance Payment के बाद ही सप्लाई दे रही हैं। इसका असर छोटे और निजी पेट्रोल पंपों पर सबसे ज्यादा देखने को मिल रहा है। कई पंपों पर दिन खत्म होने से पहले ही तेल खत्म हो जा रहा है।
देहरादून में लगभग 100 पेट्रोल पंप संचालित हैं, लेकिन ज्यादातर के पास सिर्फ दो से तीन दिन का ही Fuel Stock बचा है। कुछ छोटे पंपों की स्थिति और खराब है, जहां केवल एक दिन का स्टॉक बचा हुआ है। गुरुवार को शहर के कुछ पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म होने के कारण वाहन चालकों को बिना ईंधन लौटना पड़ा।
चारधाम यात्रा और Tourism Season की वजह से राज्य में Fuel Demand लगातार बढ़ रही है। हर दिन लाखों लीटर पेट्रोल और डीजल की खपत हो रही है। वीकेंड पर मसूरी, नैनीताल, ऋषिकेश और अन्य Tourist Destinations में भारी भीड़ पहुंचती है, जिससे आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है।
कुमाऊं मंडल में भी स्थिति चिंताजनक बनती जा रही है। हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों को मांग के मुकाबले काफी कम सप्लाई मिल रही है। कई पंपों पर शाम तक ईंधन खत्म हो रहा है। अल्मोड़ा में अधिकांश पेट्रोल पंपों पर स्टॉक समाप्त हो चुका है, जबकि बागेश्वर में भी कई पंपों पर पेट्रोल उपलब्ध नहीं है।
पेट्रोल पंप संचालकों का कहना है कि पहले कंपनियां 40 लाख रुपये तक का ईंधन उधार उपलब्ध करा देती थीं, लेकिन अब Cash and Delivery System लागू कर दिया गया है। इससे छोटे कारोबारियों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है और सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।
Fuel Crisis को देखते हुए राज्य सरकार और परिवहन विभाग ने वैकल्पिक ऊर्जा पर फोकस बढ़ा दिया है। देहरादून में एलपीजी ऑटो को CNG में बदलने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इसके अलावा सरकारी विभागों में Electric Vehicles के इस्तेमाल को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। लोक निर्माण विभाग ने अधिकारियों को Pooling System के जरिए कार्यालय आने के निर्देश दिए हैं।
सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और नियमित निगरानी की जा रही है। हालांकि, बढ़ती मांग और सीमित सप्लाई को देखते हुए लोगों की चिंता लगातार बढ़ रही है। यदि आने वाले दिनों में सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो उत्तराखंड में Fuel Shortage का असर आम जनजीवन और पर्यटन दोनों पर पड़ सकता है।