Uttarakhand Disaster Alert: Major government action before monsoon, drone survey to be conducted
उत्तराखंड में हर साल मानसून सीजन के दौरान भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने जैसी प्राकृतिक आपदाएं लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती हैं। पिछले साल हुई धराली आपदा ने राज्य की Disaster Preparedness पर कई सवाल खड़े किए थे। अब इसी अनुभव से सबक लेते हुए उत्तराखंड सरकार ने संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने और पहले से सुरक्षा उपाय तय करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
राज्य आपदा प्रबंधन विभाग ने उन इलाकों को चिन्हित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जहां पहले आपदा से भारी नुकसान हो चुका है या भविष्य में आबादी को खतरा हो सकता है। इसके लिए Satellite Survey और Drone Survey जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
तीन जिलों में शुरू हुआ हाई-टेक सर्वे
पहले चरण में उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जिलों को चुना गया है। ये जिले अक्सर Landslide, Flash Flood और Cloudburst जैसी घटनाओं से प्रभावित रहते हैं। आपदा प्रबंधन विभाग की टीम इन जिलों में विस्तृत सर्वे कर चुकी है और शुरुआती रिपोर्ट संबंधित जिला प्रशासन को सौंप दी गई है।
विशेषज्ञों ने सेटेलाइट इमेज और ड्रोन मैपिंग के जरिए ऐसे इलाकों की पहचान की है, जहां अतिवृष्टि, गदेरे में पानी बढ़ने, नालों के उफान या मलबा आने से खतरा पैदा हो सकता है।
Disaster Mitigation Plan पर होगा काम
आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि सर्वे रिपोर्ट के आधार पर जिलों में Mitigation Measures तय किए जाएंगे। जहां जरूरत होगी वहां सुरक्षा उपकरण, चेतावनी सिस्टम और Monitoring Instruments लगाए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में आबादी को सबसे ज्यादा खतरा है, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी ताकि मानसून के दौरान समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
डैम से छोड़े जाने वाले पानी की भी होगी Monitoring
राज्य सरकार इस बार Dam Water Release Monitoring पर भी विशेष ध्यान दे रही है। अधिकारियों के मुताबिक, डैम अथॉरिटी से समन्वय कर यह मॉनिटर किया जाएगा कि पानी छोड़ने के बाद जलस्तर कितनी तेजी से बढ़ सकता है और किन क्षेत्रों में उसका असर पड़ सकता है।
इसके लिए कई जगहों पर Warning Siren लगाए गए हैं। आगामी बैठक में डैम अथॉरिटी से और संवेदनशील क्षेत्रों में सायरन लगाने का अनुरोध किया जाएगा।
Earthquake Project के तहत भी लगाए जा रहे Siren
आपदा प्रबंधन विभाग भूकंप परियोजना के तहत भी Early Warning System मजबूत कर रहा है। राज्य के कई संवेदनशील इलाकों में पहले ही सायरन लगाए जा चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि आपदा आने से पहले लोगों तक Alert पहुंच सके और नुकसान को कम किया जा सके।
मानसून से पहले सरकार की बड़ी चुनौती
उत्तराखंड का अधिकांश पर्वतीय क्षेत्र Disaster Sensitive Zone माना जाता है। हर साल बारिश के दौरान सड़कें टूटने, गांवों के कटने और लोगों के फंसने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। ऐसे में Monsoon 2026 से पहले सरकार की यह तैयारी बेहद अहम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संवेदनशील क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर वैज्ञानिक तरीके से योजना बनाई जाए, तो जान-माल के नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।