Uniform Civil Code Ordinance लागू, अब गलत पहचान पर भी टूट सकता है विवाह

उत्तराखंड (Uttarakhand) में लागू Uniform Civil Code (UCC) को एक वर्ष पूरा होने से पहले बड़ा अपडेट मिला है। राज्य सरकार द्वारा लाए गए UCC Amendment Ordinance को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है, जिसके बाद संशोधित समान नागरिक संहिता प्रदेश में लागू हो गई है।

गौरतलब है कि 27 जनवरी को उत्तराखंड में यूसीसी लागू हुए एक साल पूरा होने जा रहा है। इससे पहले सरकार ने इसके क्रियान्वयन को और अधिक effective, transparent और citizen-friendly बनाने के लिए अहम संशोधन किए हैं।

UCC Amendment Ordinance का उद्देश्य क्या है?

सरकार के अनुसार, अध्यादेश के जरिए समान नागरिक संहिता के कई प्रावधानों में

procedural, administrative और penal reforms किए गए हैं, ताकि इसके पालन में किसी तरह की अस्पष्टता, देरी या दुरुपयोग की संभावना न रहे।

UCC One Year Update: अब तक 5 लाख से ज्यादा आवेदन

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, Uniform Civil Code Uttarakhand के तहत अब तक 5 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। सरकार का दावा है कि इस दौरान एक भी मामले में निजता (privacy violation) का उल्लंघन नहीं हुआ है, जो डिजिटल सिस्टम की पारदर्शिता को दर्शाता है।

संशोधित UCC में ये हुए अहम बदलाव (Key Amendments Explained)

1. नए कानून लागू

अब Criminal Procedure Code (CrPC), 1973 के स्थान पर

Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 और

दंडात्मक मामलों में Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 लागू की गई है।

2. सक्षम प्राधिकारी में बदलाव

धारा 12 के तहत अब ‘सचिव’ के बजाय ‘अपर सचिव (Additional Secretary)’ को सक्षम प्राधिकारी बनाया गया है।

3. तय समय में काम न होने पर स्वतः कार्रवाई

यदि उप-पंजीयक (Sub-Registrar) समय सीमा में कार्यवाही नहीं करता है, तो मामला स्वतः पंजीयक (Registrar) और Registrar General को भेजा जाएगा।

4. उप-पंजीयक को अपील का अधिकार

अब उप-पंजीयक पर लगाए गए दंड के खिलाफ appeal का अधिकार दिया गया है।

साथ ही दंड की वसूली land revenue की तरह की जाएगी।

5. गलत पहचान बनी विवाह निरस्तीकरण का आधार

विवाह के समय identity misrepresentation पाए जाने पर विवाह को annul (निरस्त) किया जा सकता है।

6. विवाह और Live-in Relationship में सख्त सजा

विवाह और Live-in Relationship में

बल, दबाव, धोखाधड़ी या अवैध कृत्य पाए जाने पर strict punishment provisions लागू किए गए हैं।

7. Live-in संबंध खत्म होने पर प्रमाण पत्र

लिव-इन संबंध की समाप्ति पर अब Registrar द्वारा Termination Certificate जारी किया जाएगा।

8. ‘विधवा’ शब्द हटाकर ‘जीवनसाथी’

अनुसूची-2 में अब ‘Widow’ की जगह ‘Spouse (जीवनसाथी)’ शब्द का प्रयोग होगा।

9. पंजीकरण निरस्त करने का अधिकार

विवाह, तलाक, लिव-इन संबंध और उत्तराधिकार से जुड़े पंजीकरण को निरस्त करने की शक्ति अब Registrar General को दी गई है।

क्यों अहम है यह संशोधन?

विशेषज्ञों के मुताबिक, ये संशोधन

कानून को gender-neutral बनाते हैं

misuse और delay पर रोक लगाते हैं

नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा को मजबूत करते हैं