UP Political News: Why is Aparna Yadav's relationship with the BJP repeatedly mired in controversy?
UP Politics News: समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav के छोटे भाई Prateek Yadav द्वारा पत्नी और भाजपा नेता Apurna Yadav से तलाक की घोषणा के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। प्रतीक यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में अपर्णा यादव पर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें स्वार्थी बताते हुए कहा कि वह केवल प्रसिद्धि हासिल करना चाहती हैं।
इस बयान के बाद BJP Leader Apurna Yadav एक बार फिर सुर्खियों में आ गई हैं। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष होने के बावजूद अपर्णा यादव बीजेपी के लिए नई नहीं, बल्कि लगातार उभरती हुई सियासी चुनौती बनती नजर आ रही हैं। पार्टी में शामिल होने के बाद बीते चार वर्षों में उनसे जुड़े कई विवाद बीजेपी की असहजता बढ़ा चुके हैं।
2022 विधानसभा चुनाव से पहले टिकट की मांग
साल 2022 Uttar Pradesh Assembly Election से ठीक पहले अपर्णा यादव ने समाजवादी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी जॉइन की थी। बीजेपी में आने के तुरंत बाद उन्होंने विधानसभा चुनाव का टिकट पाने की इच्छा जताई। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई थी कि उन्हें लखनऊ सीट से उम्मीदवार बनाया जा सकता है, लेकिन पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया। इसके बाद अपर्णा ने खुद को बीजेपी की समर्पित कार्यकर्ता बताते हुए संगठन को मजबूत करने की बात कही।
बड़े पद के लिए BJP पर लगातार दबाव
टिकट न मिलने के बावजूद अपर्णा यादव की राजनीतिक महत्वाकांक्षा कम नहीं हुई। Mulayam Singh Yadav Death के बाद मैनपुरी लोकसभा सीट समेत तीन सीटों पर उपचुनाव घोषित हुए। इसी दौरान अपर्णा यादव ने बीजेपी नेतृत्व पर उपचुनाव का टिकट देने का दबाव बनाना शुरू किया, जिससे पार्टी के भीतर असहज स्थिति पैदा हुई।
Lok Sabha Election 2024 में भी आजमाया जोर
Lok Sabha Election 2024 के दौरान भी अपर्णा यादव टिकट की दौड़ में सक्रिय रहीं। इसके लिए उन्होंने CM Yogi Adityanath से लेकर दिल्ली के वरिष्ठ नेताओं तक मुलाकातें कीं। कभी मुख्यमंत्री को अपनी गोशाला में आमंत्रित करना, तो कभी समाजवादी पार्टी के खिलाफ मुखर प्रचार करना—अपर्णा यादव कई बार चर्चा में रहीं, लेकिन अंततः उन्हें लोकसभा का टिकट नहीं मिल सका।
महिला आयोग के उपाध्यक्ष पद से भी जताई नाराजगी
सितंबर 2024 में योगी सरकार ने अपर्णा यादव को UP State Women Commission Vice Chairperson नियुक्त किया। हालांकि, बड़े राजनीतिक पद की उम्मीद लगाए बैठी अपर्णा यादव इस जिम्मेदारी से संतुष्ट नहीं दिखीं। उन्होंने कई दिनों तक पदभार ग्रहण नहीं किया, जिससे बीजेपी की अंदरूनी असहजता और बढ़ गई।
KGMU विवाद से बढ़ी पार्टी की किरकिरी
हाल ही में KGMU Conversion Controversy के दौरान अपर्णा यादव बिना पूर्व सूचना अपने समर्थकों के साथ वीसी चैंबर पहुंच गईं। वहां विश्वविद्यालय प्रशासन से उनकी तीखी बहस हुई और मामला तूल पकड़ गया। यह विवाद राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया, जिससे बीजेपी को सार्वजनिक स्तर पर आलोचना झेलनी पड़ी।
BJP के लिए बढ़ती चुनौती?
तलाक विवाद से लेकर टिकट की मांग, पद को लेकर नाराजगी और प्रशासनिक टकराव—इन सभी मामलों ने अपर्णा यादव को एक प्रभावशाली लेकिन विवादास्पद चेहरा बना दिया है। UP Political Analysis के मुताबिक, अपर्णा यादव की गतिविधियां बीजेपी के लिए बार-बार असहज हालात पैदा कर रही हैं, जिससे पार्टी की रणनीति और अनुशासन पर सवाल उठने लगे हैं।