Uttarakhand Forest News: बाघों का आतंक, एक महीने से कम समय में कई मौतें

Uttarakhand News: उत्तराखंड में Human-Wildlife Conflict की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। भालू के बाद अब Tiger Attack in Uttarakhand के मामले तेजी से बढ़े हैं। चालू महीने में अब तक वन्यजीवों के हमलों में छह लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से चार मौतें बाघ के हमलों में हुई हैं।

वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बीते वर्ष तक मानव-वन्यजीव संघर्ष में कुल 68 लोगों की मौत दर्ज की गई थी, जबकि 488 लोग घायल हुए थे। इस दौरान फसलों, पालतू पशुओं और संपत्ति को भी भारी नुकसान पहुंचा था। पहले Bear Attack के मामले अधिक सामने आ रहे थे। तापमान गिरने के बाद भालुओं के हाइबरनेशन में जाने से हमलों में कमी की उम्मीद थी, लेकिन अभी भी भालू के हमले रिपोर्ट हो रहे हैं।

इसी बीच Tiger Attacks में अचानक इजाफा देखा गया है। केवल 19 दिनों के भीतर बाघ के हमलों में चार लोगों की जान गई है। ये घटनाएं Kalagarh Tiger Reserve, रामनगर और Terai East Forest Division क्षेत्रों में सामने आई हैं। वहीं, Leopard Attack के दो मामलों में भी मौतें हुई हैं—एक महिला की मृत्यु नैनीताल वन प्रभाग में हुई, जबकि पौड़ी जिले के बाड़ा गांव में एक व्यक्ति तेंदुए का शिकार बना।

पिछले साल भी रहे बाघ के हमले घातक

वन विभाग के अनुसार वर्ष 2025 में बाघों के हमलों में 12 लोगों की मौत हुई थी और पांच लोग घायल हुए थे। वहीं तेंदुओं के हमलों में 19 मौतें और 102 घायल होने के मामले दर्ज किए गए थे। ये आंकड़े Wildlife Conflict in Uttarakhand की गंभीरता को दर्शाते हैं।

वन अधिकारियों का कहना है कि यह समय बाघों के Breeding Season का होता है, जिस कारण उनकी गतिविधियां अधिक आक्रामक हो सकती हैं। ऐसे में लोगों को जंगल की ओर जाने से बचना चाहिए। यदि किसी जरूरी कार्य से जाना ही पड़े, तो समूह में जाएं, सतर्क रहें और आवाज करते हुए आगे बढ़ें।

प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा के अनुसार, लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ सुरक्षा उपाय भी बढ़ाए जा रहे हैं ताकि मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते टकराव को कम किया जा सके।