चारधाम यात्रा 2025: शुभारंभ की तिथि घोषित, तैयारियां जोरों पर
उत्तराखंड की विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2025 इस वर्ष 30 अप्रैल से आरंभ होगी। धार्मिक परंपरा के अनुसार, अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा की शुरुआत होगी। इसी क्रम में, टिहरी जिले के नरेंद्र नगर राजमहल में वसंत पंचमी के अवसर पर बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा की गई।
4 मई को खुलेंगे बद्रीनाथ धाम के कपाट—
बद्रीनाथ धाम के कपाट इस वर्ष 4 मई 2025 को प्रातः 6 बजे श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोल दिए जाएंगे। टिहरी राजपरिवार, बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति, डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के सदस्य और धर्माचार्यों की उपस्थिति में यह तिथि निर्धारित की गई।
22 अप्रैल से गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा होगी प्रारंभ—
भगवान बदरी-विशाल के अभिषेक और अखंड ज्योति के लिए आवश्यक पवित्र तेल की तैयारी हेतु 22 अप्रैल को विशेष अनुष्ठान किया जाएगा। इस दौरान सुहागन महिलाएं पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार तिलों से तेल निकालेंगी। इसी दिन गाडू घड़ा (पवित्र तेल कलश) यात्रा भी आरंभ होगी।
केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि 26 फरवरी को घोषित होगी—
महाशिवरात्रि के दिन, 26 फरवरी को ऊखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर में पंचांग गणना के पश्चात केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की तिथि की घोषणा होगी।
गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट 30 अप्रैल को खुलेंगे—-
गंगोत्री मंदिर समिति हिंदू नववर्ष पर गंगोत्री धाम के कपाट खुलने की तिथि घोषित करेगी, जबकि यमुनोत्री मंदिर समिति यमुना जयंती पर यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने और देव डोलियों के धाम पहुंचने की जानकारी देगी।
वैशाखी पर मद्महेश्वर और तुंगनाथ धाम के कपाट खुलेंगे—
द्वितीय केदार मद्महेश्वर और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट खुलने की तिथि वैशाखी पर्व पर घोषित की जाएगी।
चारधाम यात्रा की तैयारियां जोरों पर—
चारधाम यात्रा 2025 की तिथियां घोषित होते ही प्रशासन और मंदिर समितियां श्रद्धालुओं की सुविधा एवं यात्रा को सुगम बनाने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं करने में जुट गई हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि बद्रीनाथ धाम के कपाट प्रतिवर्ष वसंत पंचमी को घोषित किए जाते हैं, जबकि कपाट बंद होने की तिथि विजयादशमी के दिन तय की जाती है। पिछले वर्ष 17 नवंबर 2024 को बद्रीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद किए गए थे, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे थे।