Repo Rate Cut के बाद भी EMI कम क्यों नहीं हुई? जानिए Fixed और Floating Interest Rate का पूरा सच

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा Repo Rate में कटौती (Repo Rate Cut) किए जाने के बावजूद, कई बैंक अभी तक Interest Rate Reduction का पूरा लाभ अपने ग्राहकों को नहीं दे रहे हैं। खासकर, वे ग्राहक जिन्होंने पहले से Home Loan या अन्य किसी प्रकार का Loan ले रखा है, उनकी EMI में कोई बदलाव नहीं आया है।

वहीं, कुछ बैंक नए ग्राहकों को कम ब्याज दर पर लोन ऑफर कर रहे हैं और उसका प्रचार भी कर रहे हैं। ऐसे में मौजूदा लोन ग्राहकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर उनके लोन पर Interest Rate Cut Benefit क्यों नहीं मिल रहा?

Fixed vs Floating Rate: क्या है इनके पीछे की रणनीति?

बैंक ग्राहकों को दो प्रकार की ब्याज दरों पर लोन देते हैं—Fixed Rate और Floating Rate.

  • Fixed Rate Loan में, जिस दर पर आपने लोन लिया है, वही दर पूरे कार्यकाल में लागू रहती है। भले ही Repo Rate घटे या बढ़े, आपकी EMI स्थिर रहती है। इसका फायदा तब मिलता है जब बाजार में ब्याज दरें बढ़ती हैं।

     

  • दूसरी ओर, Floating Interest Loan का रेट Repo Rate से जुड़ा होता है। यानी, जब RBI ब्याज दरें घटाता है, तो इस श्रेणी के लोन पर EMI में बदलाव आ सकता है। हालांकि, यह बदलाव सभी बैंकों में समान रूप से नहीं होता।

     

आप चाहें तो कुछ मामूली Processing Charges देकर अपना लोन Fixed से Floating में Convert करवा सकते हैं।

New Loans vs Existing Loans: क्या है असमानता का कारण?

बैंकों द्वारा नए लोन पर तो कम ब्याज दरें (as low as 8.0% Home Loan Interest Rate) ऑफर की जा रही हैं, लेकिन पुराने लोन पर उतनी दर से कटौती नहीं हो रही।

उदाहरण के लिए, कुछ बैंक पहले 8.40% पर लोन दे रहे थे, जिसे अब घटाकर 8.15% कर दिया गया है। लेकिन नए ग्राहकों को वही बैंक 8.0% की दर से होम लोन दे रहे हैं।

Voice of Banking के फाउंडर अश्विनी राणा के अनुसार, बैंक Repo Rate में जितनी कटौती होती है, उतनी ब्याज दरों में नहीं करते। ऐसे में ग्राहक कुछ विकल्प अपनाकर अपने लोन की EMI घटा सकते हैं।

क्या करें जब EMI में कटौती न हो रही हो?

अगर आपके लोन की ब्याज दर ज्यादा है, तो आप नीचे दिए गए विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:

  1. Interest Rate Review: सबसे पहले यह देखें कि आपका लोन Floating Category में है या नहीं। अगर है और फिर भी दरें नहीं घटी हैं, तो बैंक से पुनः Interest Rate Negotiation करें।

     

  2. Loan Transfer (Balance Transfer): अगर आपका बैंक ज्यादा ब्याज ले रहा है, तो आप दूसरे बैंक में लोन Port/Transfer कर सकते हैं। ध्यान दें, इसके लिए Foreclosure Charges और Processing Fee की जानकारी लेना जरूरी है।

     

  3. Fixed to Floating Conversion: यदि लोन Fixed Rate पर है, तो आप कुछ शुल्क के साथ उसे Floating Rate Loan में बदल सकते हैं, जिससे आगे चलकर Repo Rate में बदलाव का सीधा लाभ मिल सके।

     

सरकार की मंशा: ग्राहकों को मिले ब्याज कटौती का सीधा लाभ

केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि RBI द्वारा Repo Rate में की गई कटौती का Direct Benefit to Customers मिले ताकि अर्थव्यवस्था में गति लाई जा सके।

RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक ब्याज दरों में कमी करें और उसका फायदा मौजूदा ग्राहकों को भी दें, न कि सिर्फ नए ग्राहकों को।

पुराने Loan Holders के लिए भी राहत जरूरी

बैंकों को चाहिए कि वे Existing Loan Borrowers के लिए भी ब्याज दरों में कटौती करें ताकि ग्राहक अपनी बचत का उपयोग अन्य जरूरतों में कर सकें। इससे बाजार में Consumer Spending बढ़ेगा और Demand में उछाल आएगा।

सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में RBI बैंकों को इस संबंध में सख्त निर्देश भी दे सकता है ताकि Interest Rate Transmission को पारदर्शी और प्रभावी बनाया जा सके।