Uttarakhand’s ‘Alamban Gram Yojana’ stuck in red tape; unavailability of land compounds difficulties.
Uttarakhand Alamban Gaon Yojana: उत्तराखंड सरकार ने अनाथ बच्चों, निराश्रित महिलाओं और बालिकाओं को सुरक्षित माहौल और बेहतर भविष्य देने के उद्देश्य से आलंबन गांव योजना तैयार की है। योजना को शासन और वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के साथ सरकार की सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है, लेकिन जमीन उपलब्ध नहीं होने के कारण यह योजना अभी तक धरातल पर नहीं उतर पाई है। लंबे समय से मामला सरकारी फाइलों में ही अटका हुआ है।
देहरादून में एक साल से नहीं मिली जमीन
आलंबन गांव योजना को लागू करने के लिए महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने पिछले साल देहरादून के जिलाधिकारी से विकासनगर क्षेत्र में जमीन उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। विभाग की कोशिश थी कि देहरादून के आसपास उपयुक्त भूमि मिलने के बाद योजना को जल्द शुरू किया जाए।
हालांकि, एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद जमीन उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके बाद विभाग ने अब अपनी तलाश का दायरा बढ़ाते हुए हरिद्वार जिले में जमीन तलाशना शुरू किया है। लेकिन वहां भी अभी तक उपयुक्त भूमि मिलने की पुष्टि नहीं हुई है।
क्या है आलंबन गांव योजना?
सरकार की इस योजना का उद्देश्य ऐसे अनाथ और निराश्रित बच्चों, किशोरियों और महिलाओं को केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि उन्हें Family-Like Environment उपलब्ध कराना है। सरकार चाहती है कि बच्चों को संस्थागत माहौल के बजाय ऐसा वातावरण मिले, जहां उन्हें परिवार जैसा अपनापन और बेहतर देखभाल मिल सके।
योजना के तहत एक घर को छोटे सामुदायिक परिवार की तरह विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें बच्चों की देखभाल के लिए महिलाओं और किशोरियों की व्यवस्था की जाएगी, ताकि बच्चों को अकेलेपन या अनाथ होने का अहसास कम हो और वे सुरक्षित वातावरण में रह सकें।
सिर्फ आश्रय नहीं, आत्मनिर्भर बनाने की भी तैयारी
आलंबन गांव योजना की खास बात यह है कि इसका उद्देश्य केवल Shelter and Rehabilitation तक सीमित नहीं है। योजना के तहत यहां रहने वाली महिलाओं और बालिकाओं को अलग-अलग व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की योजना है।
इसके लिए खेती, बागवानी, मछली पालन, डेयरी और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव है। इनके अलावा स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने वाले उत्पादों की बिक्री के लिए Outlet Centres विकसित करने की भी योजना है। इससे योजना से जुड़े लोगों को रोजगार और आय का साधन उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी।
पहले से चल रहे संस्थानों से कैसे अलग होगी योजना?
उत्तराखंड में नारी निकेतन, बाल सुधार गृह और महिला पुनर्वास कल्याण केंद्र जैसी व्यवस्थाएं पहले से संचालित हैं। हालांकि, आलंबन गांव की अवधारणा को इन संस्थानों से अलग रखा गया है। विभाग का प्रयास है कि ऐसे जरूरतमंद लोग जो मौजूदा संस्थागत व्यवस्था में नहीं रहना चाहते, उन्हें परिवारनुमा माहौल वाले आलंबन गांव में रहने का विकल्प दिया जा सके।
शुरुआत में दो-तीन घर बनाने की तैयारी
महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक बंशीलाल राणा के मुताबिक योजना के शुरुआती चरण में सरकार के सहयोग से दो से तीन मकान बनाए जाने की योजना है। इसके बाद CSR Funding के जरिए योजना का विस्तार करने का प्रस्ताव है।
योजना के लिए शासन और वित्त विभाग से मंजूरी मिलने के बावजूद सबसे बड़ी चुनौती अब जमीन की उपलब्धता बनी हुई है। देहरादून में लंबे समय तक भूमि नहीं मिलने के बाद हरिद्वार में विकल्प तलाशा जा रहा है। ऐसे में इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत अब पूरी तरह उपयुक्त जमीन मिलने पर निर्भर है।
बच्चों और महिलाओं को नई जिंदगी देने की कोशिश
आलंबन गांव योजना को लागू किया जाता है तो यह उत्तराखंड में Child Welfare, Women Empowerment और Social Rehabilitation के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकती है। इसका लक्ष्य जरूरतमंद बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित छत देने के साथ-साथ उन्हें शिक्षा, कौशल और रोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाना है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मंजूरी मिलने के बाद भी जमीन की समस्या कब तक दूर होगी और Alamban Gaon Yojana कब फाइलों से निकलकर जमीन पर उतर पाएगी।