A big question on the Uttar Pradesh elections, the census schedule could change the entire election calendar.
देशभर में जनगणना 2026 की अधिसूचना जारी हो चुकी है और उत्तराखंड में इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। इस बार राज्य में पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।
हालांकि पूरे प्रदेश में जनगणना अगले साल 9 से 28 फरवरी 2027 के बीच आयोजित होगी, लेकिन उत्तराखंड के 131 गांव और तीन प्रमुख कस्बे – बदरीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में काम सितंबर 2026 में ही शुरू होगा।
जनगणना की रूपरेखा और कर्मचारी व्यवस्था
दो चरणों में होगी:
मकान सूचीकरण
जनगणना
राज्य को 30,000 गणना क्षेत्रों में बांटा गया है।
प्रत्येक क्षेत्र में एक प्रगणक और हर छह प्रगणकों पर एक सुपरवाइजर रहेगा।
उत्तराखंड में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली स्टेट लेवल इंपावर्ड कमेटी ने मकान गणना का पहला चरण 25 अप्रैल से 24 मई 2026 तक प्रस्तावित किया है।
अधिसूचना का असर और प्रशासनिक तैयारियां
अधिसूचना जारी हो चुकी है। केंद्र सरकार ने अनुरोध किया है कि जनगणना के दौरान कर्मचारियों के तबादले न हों।
प्रशासनिक सीमाएं सील कर दी गई हैं।
31 दिसंबर 2025 तक जो गांव, वार्ड, शहर और जिलाधिकार सीमाएं थीं, वही मार्च 2027 तक लागू रहेंगी।
2011 और 2026 जनगणना में अंतर
Digital & Paperless Census:
प्रत्येक प्रगणक कागज नहीं बल्कि ऐप के माध्यम से डेटा भरेगा।
CMMs पोर्टल से बैच बनाकर प्रशिक्षण और प्रगति रिपोर्ट लाइव मॉनीटरिंग संभव होगी।
Self-Enumeration Option:
नागरिक अपने घर की मकान और परिवार की जानकारी खुद भर सकते हैं।
मोबाइल नंबर से पंजीकरण के बाद आईडी प्राप्त होगी। प्रगणक के आने पर इसे दिखाना होगा।
गणना के कर्मचारी:
ज्यादातर स्थानीय शिक्षक होंगे। केवल तीन दिन का प्रशिक्षण पर्याप्त होगा।
विषम भौगोलिक क्षेत्रों में परिस्थितियों के अनुसार राज्य सरकार हेलिकॉप्टर इस्तेमाल का निर्णय ले सकती है।
घोस्ट विलेज और गैर आबाद गांव
2011 में उत्तराखंड में 16,793 राजस्व ग्राम थे, जिनमें से 1,048 गैर आबाद थे।
जनगणना टीम नौ से 28 फरवरी 2027 तक हर गांव में पहुंचेगी।
यदि वहां कोई निवास करता है तो गणना होगी, अन्यथा गैर आबाद गांवों की गणना कर ली जाएगी।