उत्तराखंड: धामी सरकार में कैबिनेट विस्तार की चर्चाओं को मिला बल, केंद्र को भेजी गई राज्य की रिपोर्ट

देहरादून: उत्तराखंड में एक बार फिर कैबिनेट विस्तार की चर्चाएं तेज हो गई हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद धामी कैबिनेट में चार पद रिक्त हो गए हैं। इस रिक्तता के बीच, सूत्रों के अनुसार, इन पदों को भरने के साथ-साथ मंत्रियों के विभागों में भी फेरबदल हो सकते हैं। इस स्थिति के मद्देनज़र प्रदेश में सरकार के भीतर चल रही राजनीति और हालिया घटनाओं ने इन अटकलों को और हवा दी है।

 

मुख्य बिंदु:

  • चंदन राम दास के निधन के बाद धामी कैबिनेट में चार पद रिक्त हैं

  • मुख्यमंत्री धामी के दिल्ली दौरे से जुड़ी चर्चाओं में विस्तार की संभावना

  • भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने संकेत दिया, केंद्रीय सरकार पर निर्भर है फैसला

राज्य सरकार ने केंद्रीय नेतृत्व को भेजी स्थिति रिपोर्ट
उत्तराखंड भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा है कि राज्य में कैबिनेट विस्तार एक निश्चित संभावना है, लेकिन इस पर अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व के हाथ में है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने वर्तमान स्थिति के बारे में रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है और अब केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है।

भट्ट ने यह भी कहा कि राज्य में कुछ हालिया घटनाओं को लेकर भी इस विषय पर चर्चा तेज हुई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दिल्ली दौरा इन चर्चाओं को और बल दे रहा है, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व से अनुमति न मिलने के कारण इसमें देरी हो रही है।

जनता की ओर से भी बदलाव की मांग
उत्तराखंड में इस वक्त जनता की ओर से भी कैबिनेट में बदलाव की मांग की जा रही है। प्रदेश में जब-जब मंत्रिमंडल विस्तार और फेरबदल की चर्चाएं होती हैं, वह कुछ समय तक सुर्खियों में रहती हैं, लेकिन फिर धीरे-धीरे ठंडी पड़ जाती हैं। हालांकि, इस बार स्थिति थोड़ी अलग दिखाई दे रही है, क्योंकि मुख्यमंत्री धामी के दिल्ली दौरे के बाद इस विषय पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है।

केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका अहम
भा.ज.पा. अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि यह स्पष्ट है कि मंत्री किसे बनाए जाएंगे और किसे हटाया जाएगा, यह निर्णय केंद्रीय नेतृत्व पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि राज्य की राजनीति और प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर केंद्रीय नेतृत्व ही इस निर्णय को अंतिम रूप देगा।

उत्तराखंड में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं और अब जब मंत्रियों के विभागों में फेरबदल और रिक्त पदों को लेकर सवाल उठ रहे हैं, तो प्रदेश की राजनीति में यह विषय चर्चा का केंद्र बन गया है।