Special-needs children in Uttarakhand schools will now be identified and receive educational support.
उत्तराखंड में Special Needs Children की पहचान और उनकी शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए राज्य स्तर पर एक नई पहल शुरू की गई है। पहली बार प्रदेश में Specific Learning Disability (SLD) और Autism से प्रभावित बच्चों की पहचान के लिए State-Level Mapping Campaign शुरू किया गया है। देहरादून के झाझरा स्थित आईटीआई दून संस्कृति स्कूल में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास अठावले ने इस अभियान का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य ऐसे बच्चों की पहचान कर उनकी जरूरत के अनुसार बेहतर Education, Guidance और Skill Development की सुविधा उपलब्ध कराना है।
हर बच्चे की Learning Ability अलग
इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की सीखने की अलग-अलग क्षमताओं को समझना है। कुछ बच्चों को पढ़ने में परेशानी हो सकती है, जबकि कुछ को लिखने या गणित समझने में कठिनाई होती है। वहीं Autism से प्रभावित बच्चों में Social Communication और व्यवहार से जुड़ी अलग-अलग जरूरतें हो सकती हैं। अभियान के तहत इन परिस्थितियों को केवल कमजोरी के तौर पर देखने के बजाय बच्चों की क्षमता और जरूरत को समझने पर जोर दिया जा रहा है।
इसके लिए शिक्षकों को विशेष Training भी दी जा रही है, ताकि वे कक्षा में बच्चों की Learning Difficulties को शुरुआती स्तर पर पहचान सकें। इसके बाद शिक्षकों और अभिभावकों के सहयोग से बच्चों को उचित मार्गदर्शन देने की कोशिश की जाएगी। अभियान का उद्देश्य है कि समय रहते पहचान होने पर बच्चों को उनकी जरूरत के मुताबिक शिक्षा और सहायता मिल सके।
झाझरा स्कूल में बच्चों से मिले रामदास अठावले
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास अठावले ने झाझरा स्थित स्कूल में विद्यार्थियों से बातचीत की और वहां उपलब्ध Educational Facilities का जायजा लिया। करीब 13 एकड़ में फैले इस संस्थान में पूर्वोत्तर भारत के लगभग 150 विद्यार्थी और 67 दिव्यांग बच्चे एक साथ शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के समाज कल्याण मंत्री खजान दास और पूर्व सांसद तरुण विजय समेत अन्य लोग मौजूद रहे। अठावले ने कहा कि दिव्यांगता किसी व्यक्ति की प्रतिभा को सीमित नहीं करती। उन्होंने Paralympic Games में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अवसर और उचित सहयोग मिलने पर दिव्यांगजन भी विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।
उन्होंने संस्थान में अतिरिक्त सुविधाएं विकसित करने और शिक्षकों के लिए Grant Support उपलब्ध कराने के संबंध में जनजातीय कार्य मंत्रालय से सहयोग का आश्वासन भी दिया।
दिव्यांगजनों के लिए योजनाओं पर भी हुई समीक्षा
रामदास अठावले ने उत्तराखंड के समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ Review Meeting भी की। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न Welfare Schemes की प्रगति की जानकारी ली गई। उन्होंने बताया कि 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 2.68 करोड़ से अधिक दिव्यांगजन दर्ज किए गए थे। केंद्र सरकार की ओर से दिव्यांगजनों से संबंधित योजनाओं के लिए करीब 950 करोड़ रुपये का प्रावधान किए जाने की जानकारी भी दी गई।
बैठक में Jan Dhan Yojana, Mudra Yojana, Ujjwala Yojana और PM Awas Yojana सहित विभिन्न योजनाओं के तहत उत्तराखंड में हुए कामों का भी उल्लेख किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 40.91 लाख Jan Dhan Accounts, 36.87 लाख लाभार्थियों को Mudra Loans और 5.05 लाख परिवारों को LPG Connections मिलने की जानकारी दी गई। वहीं PMAY-Urban के तहत लगभग 43 हजार पक्के मकानों के निर्माण और 56.73 लाख LED Bulbs के वितरण का भी उल्लेख किया गया।
इस पहल का फोकस अब विशेष जरूरतों वाले बच्चों की शुरुआती पहचान, Inclusive Education और उनकी क्षमता के अनुसार आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर रहेगा।