Two brothers stranded in Russia for 97 days returned home and recounted an ordeal that will make you shudder.
Russia Trapped Indians News: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ के दो भाइयों की रूस से सुरक्षित वतन वापसी हुई है। आनंद सिंह कार्की और भूपेंद्र सिंह कार्की करीब 97 दिनों तक रूस में फंसे रहे। घर लौटने के बाद उन्होंने अपनी दर्दनाक आपबीती साझा की। उनका दावा है कि विदेश में नौकरी के सुनहरे सपने दिखाकर उन्हें ऐसी परिस्थितियों में धकेल दिया गया, जहां 14-14 घंटे काम कराने के बावजूद खाने के लिए पूरे दिन में सिर्फ एक पाव और एक अंडा दिया जाता था। दोनों भाइयों ने नौकरी के लिए बैंक से करीब 8 लाख रुपये का कर्ज लिया था।
60-80 हजार रुपये सैलरी का दिखाया था सपना
पिथौरागढ़ के रहने वाले आनंद और भूपेंद्र रूस में नौकरी करने के लिए गए थे। दोनों को सितारगंज के एक एजेंट ने रूस की एक प्रतिष्ठित कंपनी में नौकरी दिलाने का भरोसा दिया था। एजेंट ने 10 घंटे की ड्यूटी और 60 से 80 हजार रुपये मासिक वेतन का दावा किया था।
इसी भरोसे पर भाइयों ने बैंक से करीब 8 लाख रुपये का कर्ज लिया और 6 मई को रूस पहुंच गए। लेकिन वहां पहुंचते ही उन्हें एजेंट के दावों की हकीकत का पता चला। जिस कंपनी में नौकरी दिलाने की बात कही गई थी, वह कथित तौर पर फर्जी निकली और दोनों को किसी अज्ञात स्थान पर ठेकेदार के अधीन काम करने के लिए भेज दिया गया।
14 घंटे काम, खाने के नाम पर पाव और एक अंडा
रूस पहुंचने के बाद दोनों भाइयों की जिंदगी बेहद मुश्किल हो गई। आनंद के मुताबिक, उनसे 14-14 घंटे मजदूरी कराई जाती थी। इतनी कड़ी मेहनत के बाद भी खाने के नाम पर पूरे दिन में केवल एक पाव और एक अंडा दिया जाता था।
पानी के लिए भी उन्हें पैसे खर्च करने पड़ते थे। आनंद ने बताया कि पीने के पानी की एक बोतल के लिए करीब 100 रुपये तक देने पड़ते थे। इस दौरान दोनों भाइयों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा।
चार रात जंगल में गुजारी, 17 दिन एक ही कपड़े में रहे
रूस में फंसने के दौरान दोनों भाइयों की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें शुरुआती चार रातें जंगल में बितानी पड़ीं। आनंद के अनुसार, करीब 17 दिनों तक उन्होंने एक ही जोड़ी कपड़ों में गुजारा किया।
विदेश में बेहतर नौकरी और अच्छी कमाई का सपना लेकर गए दोनों भाइयों के लिए यह अनुभव बेहद मुश्किल रहा। उनकी कहानी उन युवाओं के लिए भी चेतावनी है, जो Foreign Job, Overseas Employment और Work Abroad के नाम पर एजेंटों के दावों पर भरोसा कर लेते हैं।
मुख्यमंत्री धामी के प्रयासों से हुई सुरक्षित वापसी
दोनों भाइयों के रूस में फंसे होने की जानकारी सामने आने के बाद उत्तराखंड सरकार ने उनकी वापसी के प्रयास तेज किए। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। सरकार ने Ministry of External Affairs (MEA) और रूस स्थित भारतीय दूतावास के साथ समन्वय किया।
लगातार प्रयासों के बाद दोनों भाई सुरक्षित भारत लौट सके। मुख्यमंत्री धामी ने भी फोन पर दोनों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विदेश में संकट में फंसे उत्तराखंड के नागरिकों की मदद के लिए सरकार हरसंभव प्रयास करेगी।
घर पहुंचते ही परिवार की आंखों में छलके आंसू
करीब 97 दिनों बाद दोनों भाइयों के घर पहुंचने पर परिवार ने राहत की सांस ली। आनंद और भूपेंद्र का उनकी गर्भवती पत्नी तनुजा समेत परिजनों ने भावुक होकर स्वागत किया। परिवार ने उनकी वापसी में सहयोग के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और मददगारों का आभार जताया।
परिजनों ने एजेंट पर विदेश में नौकरी दिलाने के नाम पर ली गई रकम वापस दिलाने की मांग भी उठाई है।
विदेश में नौकरी का सपना, लेकिन एजेंट के झांसे ने बदल दी जिंदगी
आनंद और भूपेंद्र की कहानी Russia Job Scam, Overseas Job Fraud और Fake Recruitment जैसे मामलों को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। अच्छी नौकरी और आकर्षक वेतन के वादे पर विदेश जाने से पहले युवाओं के लिए एजेंट, कंपनी, रोजगार अनुबंध और वीजा संबंधी जानकारी की अच्छी तरह जांच करना बेहद जरूरी है।