Ram Mandir Donation Theft Case: Seven key questions before the new SIT; status report to be presented in the Supreme Court today.
अयोध्या स्थित Ram Mandir Donation Case में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दानपात्र की नकदी में कथित गबन के मामले में लगभग 20 दिन बाद पुलिस ने आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद हुई। मामला सामने आने के बाद गठित SIT Investigation की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू की है।
आठ लोगों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
पुलिस की प्राथमिकी में कुल आठ लोगों को नामजद किया गया है। इनमें रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्र, लवकुश मिश्र, मनीष यादव, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ल, करुणेश पांडेय और रमाशंकर मिश्र के नाम शामिल हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, सभी आरोपी किसी न किसी रूप में दानपात्र से प्राप्त नकदी की गणना या उससे जुड़ी व्यवस्था में शामिल थे।
जांच में क्या-क्या आरोप सामने आए?
प्राथमिक जांच के दौरान सामने आया कि रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू पहले ट्रस्ट के महासचिव के ड्राइवर रह चुके थे और बाद में मंदिर से जुड़े कई प्रशासनिक कार्यों में उनकी भूमिका बढ़ गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि दानपात्र की चाबियां भी उनके पास रहती थीं।
वहीं अनुकल्प मिश्र को नकदी गणना प्रक्रिया का प्रमुख सदस्य बताया गया है। जांच के दौरान उसके घर से करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद होने का दावा किया गया है। अन्य आरोपियों के यहां से भी अलग-अलग मात्रा में नकदी मिलने की बात जांच रिपोर्ट में सामने आई है।
SIT Investigation के बाद हुई कार्रवाई
मामले की जांच के लिए गठित Special Investigation Team (SIT) ने कई दिनों तक मंदिर प्रशासन, बैंक अधिकारियों, नकदी गिनने वाली एजेंसी और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ की। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज और सीसीटीवी समेत विभिन्न साक्ष्यों की पड़ताल की गई।
SIT ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपने के बाद पुलिस ने 25 जून को एफआईआर दर्ज की।
ऐसे आगे बढ़ा पूरा मामला
5 जून को दानपात्र से कथित धन गबन का मामला सार्वजनिक चर्चा में आया। इसके बाद अलग-अलग स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हुआ।
7 जून को समाजवादी पार्टी के नेता पवन पांडेय ने करोड़ों रुपये के गबन का आरोप लगाया। उसी दिन श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आरोपों पर स्पष्टीकरण जारी किया गया।
इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय ने रिपोर्ट तलब की, स्वतंत्र जांच की मांग उठी और 13 जून को SIT का गठन किया गया। 15 से 20 जून के बीच जांच टीम ने ट्रस्ट पदाधिकारियों, बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों से लगातार पूछताछ कर दस्तावेजों की जांच की।
23 जून को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सरकार को सौंपी गई और 25 जून को पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला?
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ BNS (Bharatiya Nyaya Sanhita) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। इन धाराओं में कथित रूप से आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, गबन, साक्ष्य से छेड़छाड़ और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं। मामले की जांच आगे भी जारी है और पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले नए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जांच अभी जारी
फिलहाल पुलिस और जांच एजेंसियां मामले से जुड़े सभी वित्तीय लेनदेन, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जाएगी। अभी तक दर्ज एफआईआर जांच प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।