Rahul Gandhi Visit: Conflict within Congress at Lucknow airport, Ajay Kumar Lallu denied entry pass
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi के लखनऊ दौरे के दौरान उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अंदरूनी कलह एक बार फिर खुलकर सामने आ गई। राजधानी लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट पर उस समय सियासी हलचल तेज हो गई, जब कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Ajay Kumar Lallu को राहुल गांधी के स्वागत के लिए एयरपोर्ट के अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।
इस घटनाक्रम ने UP Congress में जारी factionalism और internal conflict की चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। पार्टी के भीतर पुराने और नए नेतृत्व के बीच खींचतान अब सार्वजनिक तौर पर दिखाई देने लगी है।
एयरपोर्ट पर हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राहुल गांधी के लखनऊ पहुंचने पर प्रदेश कांग्रेस के कई बड़े नेता एयरपोर्ट पर मौजूद थे। हालांकि, स्वागत के लिए जारी की गई सुरक्षा पास सूची में अजय कुमार लल्लू का नाम शामिल नहीं था।
बताया जा रहा है कि एंट्री नहीं मिलने के बावजूद लल्लू एयरपोर्ट परिसर के बाहर डटे रहे। जैसे ही राहुल गांधी बाहर निकले और कार में बैठे, अजय कुमार लल्लू उनकी गाड़ी तक पहुंच गए। इस दौरान राहुल गांधी ने कार का शीशा नीचे किया और दोनों नेताओं के बीच कुछ देर तक बातचीत हुई।
इस पूरे घटनाक्रम ने यूपी कांग्रेस की आंतरिक राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
कभी यूपी कांग्रेस का बड़ा चेहरा थे अजय लल्लू
Ajay Kumar Lallu एक समय उत्तर प्रदेश कांग्रेस का प्रमुख चेहरा माने जाते थे। प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया और सड़क से लेकर विधानसभा तक सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई थी।
हालांकि, मौजूदा संगठनात्मक ढांचे में उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि राज्य नेतृत्व के साथ उनके रिश्तों में लंबे समय से दूरी बनी हुई है।
इसके बावजूद पार्टी हाईकमान में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। यही वजह रही कि वर्ष 2025 में कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें ओडिशा का AICC प्रभारी नियुक्त किया था।
Congress Mission UP के सामने बड़ी चुनौती
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि राहुल गांधी जैसे शीर्ष नेता के कार्यक्रम में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष को एंट्री पास न मिलना महज प्रशासनिक चूक नहीं माना जा सकता।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला UP Congress में बढ़ती गुटबाजी और संगठनात्मक असंतुलन को दर्शाता है। एक तरफ Rahul Gandhi लगातार संगठन को मजबूत और एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रदेश स्तर पर नेताओं के बीच तालमेल की कमी पार्टी की रणनीति पर असर डाल सकती है।
राजनीतिक संदेश क्या?
लखनऊ एयरपोर्ट पर हुआ यह घटनाक्रम आने वाले समय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकता है। माना जा रहा है कि पार्टी के भीतर पुराने नेताओं को किनारे लगाने और नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की कोशिशों से असंतोष बढ़ रहा है।
ऐसे समय में जब कांग्रेस 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी है, पार्टी के भीतर की यह खींचतान उसके लिए नई मुश्किलें खड़ी कर सकती है।