Ayurveda Research में बड़ा खुलासा, उत्तराखंड में मिला Medicinal Plants का नया रिकॉर्ड

उत्तराखंड एक बार फिर अपनी प्राकृतिक संपदा और Herbal Wealth को लेकर चर्चा में है। अब तक राज्य में करीब 1300 औषधीय पौधों (Medicinal Plants) का रिकॉर्ड मौजूद था, लेकिन पतंजलि रिसर्च टीम ने केवल पांच जनजातीय जिलों में अध्ययन करके 1011 औषधीय पौधों की पहचान कर सभी को चौंका दिया है। यह खोज Uttarakhand Herbal Research और Ayurveda Science के क्षेत्र में बेहद अहम मानी जा रही है।

अब पतंजलि के वैज्ञानिक और रिसर्चर उत्तराखंड के सभी 13 जिलों में नए औषधीय पौधों की तलाश में जुटे हैं। शुरुआती संकेत बता रहे हैं कि आने वाले समय में राज्य में मौजूद Medicinal Biodiversity का आंकड़ा पुराने रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ सकता है।

गांव-गांव पहुंची Patanjali Research Team

आचार्य बालकृष्ण के निर्देशन में रिसर्च टीम ने देहरादून, चमोली, पिथौरागढ़ और ऊधमसिंह नगर समेत कई जनजातीय क्षेत्रों में व्यापक सर्वे किया। टीम 122 गांवों और 14 तहसीलों तक पहुंची, जहां उन्होंने स्थानीय जनजातीय समुदायों और पारंपरिक वैद्यों से बातचीत की।

इस अध्ययन के दौरान 216 जनजातीय वैद्यों की पहचान हुई, जिनके पास पीढ़ियों से संचित Traditional Herbal Knowledge मौजूद है। शोधकर्ताओं ने इन वैद्यों से बातचीत कर 238 औषधीय पौधों का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण भी किया। कई पौधों के उपयोग और गुणों की जानकारी पहली बार सामने आई है।

जनजातीय समुदायों के पास मिला अनमोल Traditional Knowledge

स्टडी के दौरान सामने आया कि जौनसारी, भोटिया, थारू, बुक्सा और वन राजी जनजातियां वर्षों से प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के जरिए कई बीमारियों का इलाज कर रही हैं।

इन समुदायों द्वारा Joint Pain, Arthritis, Diabetes, Asthma, Kidney Stone, Fever, Cold-Cough, Mouth Ulcer, Bone Fracture, Piles और Skin Diseases जैसी समस्याओं का उपचार पारंपरिक तरीके से किया जा रहा है। खास बात यह रही कि जोड़ों के दर्द और गठिया के इलाज में Herbal Treatment का सबसे ज्यादा इस्तेमाल देखने को मिला।

पहली बार हुई Tribal Geo-Tagging

पतंजलि टीम को जनजातीय इलाकों तक पहुंचने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा, क्योंकि कई समुदाय घुमंतू जीवन शैली अपनाते हैं। इसके बावजूद टीम ने पहली बार Tribal Geo-Tagging का काम किया।

रिपोर्ट के मुताबिक, जहां सरकारी आंकड़ों में करीब 50 हजार जनजातीय परिवार बताए जाते थे, वहीं पतंजलि के अध्ययन में करीब 28 हजार परिवारों की वास्तविक मौजूदगी सामने आई।

इसके अलावा, जनजातीय समुदायों को रोजगार, कृषि और व्यवसाय से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए गए। Patanjali द्वारा ‘अन्रदाता ऐप’ के जरिए इन समुदायों को अपने उत्पाद सीधे बेचने का प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया गया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई है।

आचार्य बालकृष्ण ने क्या कहा?

आचार्य बालकृष्ण के अनुसार, जनजातीय समाज के पास मौजूद Traditional Medicinal Knowledge मानवता की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने कहा कि पतंजलि इस विलुप्त होती विरासत को वैज्ञानिक तरीके से संरक्षित करने का काम कर रहा है।

उन्होंने बताया कि अभी तक सीमित क्षेत्रों में ही 1011 Medicinal Plants की पहचान हो चुकी है और अब रिसर्च टीम पूरे उत्तराखंड में Rare Herbs और Medicinal Species की खोज में जुटी हुई है।

उत्तराखंड बन सकता है Herbal Research Hub

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की रिसर्च आगे बढ़ती रही तो उत्तराखंड देश का सबसे बड़ा Herbal Research Hub बन सकता है। हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली दुर्लभ जड़ी-बूटियां Ayurveda Industry, Pharma Sector और Natural Medicine Market के लिए बेहद अहम साबित हो सकती हैं।

यह खोज न सिर्फ आयुर्वेद और Herbal Medicine के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है, बल्कि जनजातीय समुदायों की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली को वैश्विक पहचान भी दिला सकती है।