Haridwar Forest: Two tigers' severed legs found; 50 forest workers engaged in search
उत्तराखंड के हरिद्वार वन प्रभाग की श्यामपुर रेंज से वन्यजीव अपराध का बेहद दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां शिकारियों ने दो बाघों को मौत के घाट उतारने के बाद उनके चारों पैर काट लिए। घटना के बाद वन विभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
मृत बाघों में एक नर और एक मादा टाइगर शामिल हैं, जिनकी उम्र करीब दो वर्ष बताई जा रही है। अधिकारियों के अनुसार दोनों एक ही बाघिन के शावक थे। अब उनकी मां बाघिन भी लापता बताई जा रही है, जिसकी तलाश के लिए बड़ा Search Operation चलाया जा रहा है।
जहरीली भैंस से किया गया शिकार
वन विभाग की शुरुआती जांच में सामने आया है कि शिकारियों ने एक मृत भैंस पर जहरीला पदार्थ लगाया था। बताया जा रहा है कि सजनपुर बीट के जंगल में बाघों ने उस भैंस का मांस खाया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई।
इसके बाद आरोपी बाघों के शवों के पास पहुंचे और उनके चारों पैर काटकर अपने साथ ले गए। माना जा रहा है कि Tiger Body Parts की तस्करी के लिए यह वारदात की गई।
जंगल में मिले क्षत-विक्षत शव
रविवार शाम करीब साढ़े छह बजे वन विभाग की टीम को श्यामपुर कम्पार्टमेंट संख्या-09 में एक बाघ का शव मिला। पास ही मृत भैंस भी पड़ी थी।
बाद में पूछताछ और तलाशी के दौरान घटनास्थल से करीब 150 मीटर दूर एक अन्य मादा बाघ का शव बरामद हुआ, जिसके पैर भी कटे हुए थे।
एक आरोपी गिरफ्तार, तीन फरार
मामले में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए Alam alias Fammi को गिरफ्तार किया है। वह श्यामपुर क्षेत्र की गुज्जर बस्ती का रहने वाला बताया गया है।
वहीं Aamir Hamza alias Miyan, Ashiq और Juppi फरार बताए जा रहे हैं। वन विभाग और पुलिस की टीमें उनकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
मां बाघिन की तलाश में 50 वनकर्मी
दो बाघों की मौत के बाद अब वन विभाग को उनकी मां बाघिन की सुरक्षा की चिंता सता रही है। अधिकारियों का कहना है कि शावक पूरी तरह स्वतंत्र नहीं हुए थे और संभवतः अपनी मां के साथ ही जंगल में घूम रहे थे।
बाघिन की तलाश के लिए जंगल के संवेदनशील इलाकों में 10 Camera Traps लगाए गए हैं। करीब 50 वनकर्मी और अधिकारी लगातार गश्त और Search Operation चला रहे हैं।
चीला रेंज से आते हैं अधिकतर बाघ
वन अधिकारियों के मुताबिक हरिद्वार वन क्षेत्र में दिखने वाले ज्यादातर बाघ Rajaji Tiger Reserve की चीला रेंज से आते हैं। आंकड़ों के अनुसार रिजर्व के करीब 70 प्रतिशत बाघ इसी इलाके में विचरण करते हैं।
श्यामपुर क्षेत्र भी चीला रेंज से सटा हुआ है, इसलिए यहां लगातार टाइगर मूवमेंट बना रहता है।
2017 में भी सामने आया था ऐसा मामला
वन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक वर्ष 2017 में चिड़ियापुर क्षेत्र में भी एक बाघ को जहर देकर मारने का मामला सामने आया था। उस घटना में भी बाघ के अंग काटे गए थे।
अब एक बार फिर सामने आए इस मामले ने Wildlife Protection और Tiger Conservation को लेकर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।