राहुल गांधी ने DMK का नाम तक नहीं लिया! क्या alliance में अंदरखाने कुछ बड़ा चल रहा है?

Tamil Nadu Elections 2026 के करीब आते ही राज्य में सियासी माहौल तेजी से गर्म होता जा रहा है। एक ओर Prime Minister Narendra Modi लगातार राज्य के दौरे कर BJP-NDA campaign को धार दे रहे हैं, तो दूसरी ओर Rahul Gandhi की अब तक तमिलनाडु के चुनाव प्रचार से दूरी ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ चुनावी रणनीति का नहीं, बल्कि Congress-DMK alliance की अंदरूनी स्थिति का भी उठने लगा है। खासतौर पर Puducherry में जो तस्वीर सामने आई, उसने इन अटकलों को और तेज कर दिया है कि क्या दक्षिण भारत में विपक्षी गठबंधन के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है।

PM Modi का लगातार तमिलनाडु फोकस, South India में BJP की बढ़ी सक्रियता

पिछले कुछ हफ्तों में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने तमिलनाडु में अपनी राजनीतिक मौजूदगी को काफी मजबूत किया है। बताया जा रहा है कि बीते दो महीनों के भीतर वे कई बार राज्य का दौरा कर चुके हैं और NDA candidates के समर्थन में लगातार जनसभाएं, रोडशो और संगठनात्मक बैठकें कर रहे हैं।

अब उनकी अगली बड़ी चुनावी रैली 15 अप्रैल को प्रस्तावित है, जहां वे Nagercoil में एक विशाल जनसभा को संबोधित कर सकते हैं। यह साफ संकेत है कि भाजपा इस बार तमिलनाडु को सिर्फ प्रतीकात्मक राज्य नहीं, बल्कि serious electoral battleground के रूप में देख रही है।

दूसरी तरफ Rahul Gandhi अब तक क्यों नहीं उतरे मैदान में?

PM Modi के इस high-energy campaign के ठीक उलट, कांग्रेस नेता Rahul Gandhi अब तक तमिलनाडु में चुनाव प्रचार के लिए सक्रिय रूप से नजर नहीं आए हैं। उनकी इस गैरमौजूदगी ने विपक्षी राजनीति के भीतर कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि चुनावी समय में किसी बड़े नेता की अनुपस्थिति सिर्फ शेड्यूल का मामला नहीं होती, बल्कि कई बार यह alliance coordination, seat sharing tension या strategic discomfort का भी संकेत हो सकती है।

2021 की तुलना में इस बार बदली तस्वीर

राजनीतिक पर्यवेक्षक इस पूरे घटनाक्रम की तुलना पिछले Tamil Nadu Assembly Election से कर रहे हैं। उस समय राहुल गांधी ने चुनावी माहौल बनने से पहले ही राज्य में काफी सक्रिय भूमिका निभाई थी और शुरुआती दौर से ही प्रचार में उतर गए थे।

लेकिन इस बार उनकी रणनीति बिल्कुल अलग नजर आ रही है। यही बदलाव अब राजनीतिक गलियारों में यह सवाल पैदा कर रहा है कि क्या कांग्रेस और DMK के बीच इस बार तालमेल पहले जैसा मजबूत नहीं है।

Puducherry में दिखी दूरी ने बढ़ाई सियासी हलचल

गठबंधन में संभावित असहजता का सबसे बड़ा संकेत Puducherry campaign के दौरान देखने को मिला। वहां राहुल गांधी ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस और सहयोगी दलों के लिए वोट मांगे, लेकिन उनके भाषण में DMK या उसके नेता M.K. Stalin का जिक्र तक नहीं हुआ।

राजनीति में भाषणों की भाषा और चुप्पी दोनों मायने रखती हैं। ऐसे में राहुल गांधी का यह रुख कई लोगों को असामान्य लगा, खासकर तब जब DMK उसी व्यापक विपक्षी धड़े का हिस्सा है जिसके साथ कांग्रेस मैदान में है।

सबसे दिलचस्प बात: एक ही शहर में थे Rahul और Stalin, फिर भी मुलाकात नहीं

इस पूरे प्रकरण को और दिलचस्प तब बना दिया जब यह सामने आया कि जिस दिन राहुल गांधी Puducherry में प्रचार कर रहे थे, उसी दिन M.K. Stalin भी वहीं मौजूद थे। लेकिन दोनों नेताओं के कार्यक्रम इस तरह तय किए गए कि उनका आमना-सामना ही न हो।

राहुल गांधी ने दिन के पहले हिस्से में अपना चुनावी कार्यक्रम किया, जबकि स्टालिन बाद में पहुंचे। इस तरह दोनों नेताओं की मौजूदगी के बावजूद joint appearance या साझा मंच की तस्वीर सामने नहीं आई।

राजनीतिक संदेशों की दुनिया में इस तरह की दूरी अक्सर अपने आप में बहुत कुछ कह जाती है।

क्या seat sharing को लेकर बढ़ा मनमुटाव?

राजनीतिक हलकों में अब सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि कहीं यह दूरी seat sharing dispute का असर तो नहीं। सूत्रों के मुताबिक, चुनावी तालमेल और सीटों के बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच कुछ समय से खींचतान की खबरें चल रही थीं।

यही वजह है कि अब Puducherry की घटनाओं को उसी political friction की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है। अगर गठबंधन में अंदरखाने असहमति रही है, तो उसका असर प्रचार रणनीति और सार्वजनिक मंचों पर दिखाई देना स्वाभाविक माना जा रहा है।

DMK की सफाई: सब कुछ पहले से तय था

हालांकि इन अटकलों के बीच DMK leadership ने सफाई भी दी है। पार्टी की ओर से कहा गया कि दोनों नेताओं के कार्यक्रम पहले से तय थे और समय की कमी के कारण साझा रैली या संयुक्त मंच संभव नहीं हो पाया।

DMK की तरफ से यह भी संकेत दिया गया है कि आने वाले दिनों में राहुल गांधी और स्टालिन एक साथ चुनाव प्रचार करते दिखाई दे सकते हैं। लेकिन फिलहाल जो तस्वीर बनी है, उसने राजनीतिक बहस को थामने नहीं दिया है।

Congress क्या कह रही है?

कांग्रेस के भीतर से भी यह कहा जा रहा है कि राहुल गांधी के तमिलनाडु दौरे का कार्यक्रम अभी अंतिम रूप में तय नहीं हुआ है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उनका राज्य दौरा first phase polling के बाद हो सकता है।

संभावना जताई जा रही है कि 10 अप्रैल के बाद राहुल गांधी तमिलनाडु में चुनावी प्रचार के लिए उतर सकते हैं। हालांकि राजनीति में timing भी बहुत अहम होती है, और यही वजह है कि उनकी देरी से एंट्री पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।

BJP को मिल रहा narrative advantage?

जब एक तरफ PM Modi लगातार on-ground campaign में दिख रहे हों और दूसरी तरफ विपक्ष के प्रमुख चेहरे की मौजूदगी देर से हो, तो इसका असर सीधे public perception पर पड़ता है। यही कारण है कि भाजपा को इस समय narrative advantage मिलता दिखाई दे रहा है।

BJP और NDA यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे दक्षिण भारत में इस बार पहले से कहीं ज्यादा गंभीरता और आक्रामकता के साथ मैदान में हैं। ऐसे में अगर विपक्षी गठबंधन में समन्वय की कमी की धारणा बनती है, तो उसका चुनावी असर भी पड़ सकता है।

क्या Congress-DMK alliance सचमुच कमजोर पड़ रहा है?

फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि Congress-DMK alliance वास्तव में टूटने या कमजोर होने की स्थिति में है। लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि जो दृश्य और संकेत अभी तक सामने आए हैं, उन्होंने कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर आने वाले दिनों में राहुल गांधी और स्टालिन एक साझा मंच पर नजर आते हैं, तो इन अटकलों पर कुछ हद तक विराम लग सकता है। लेकिन अगर दूरी बनी रहती है, तो यह मुद्दा चुनावी नैरेटिव का बड़ा हिस्सा बन सकता है।

South Politics में अब आगे क्या?

तमिलनाडु की राजनीति हमेशा से regional identity, alliance arithmetic, leadership chemistry और ground-level mobilization पर आधारित रही है। ऐसे में यहां सिर्फ बयान नहीं, बल्कि नेताओं की public optics भी बहुत मायने रखती है।

फिलहाल तस्वीर साफ है —
Modi visible हैं, Rahul absent हैं, और Stalin cautious दिख रहे हैं।

अब देखना यह होगा कि चुनाव नजदीक आने के साथ यह दूरी सिर्फ शेड्यूल की समस्या साबित होती है या फिर यह वाकई South India politics में किसी बड़े राजनीतिक बदलाव का संकेत है।