नीम करौरी बाबा के ट्रस्ट पर फिर उठे सवाल, अब पैतृक संपत्ति को लेकर सामने आया नया विवाद

बाबा नीम करौरी से जुड़े ट्रस्ट को लेकर विवाद एक बार फिर सामने आया है। उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में चढ़ावे और ट्रस्ट की व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बाद अब उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में बाबा नीम करौरी की पैतृक संपत्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बाबा की छह पोतियों ने जिलाधिकारी के सामने शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक संपत्ति पर ट्रस्ट ने कथित तौर पर अवैध कब्जा कर रखा है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं।

6 पोतियों ने प्रशासन से की शिकायत

फिरोजाबाद में सामने आए इस विवाद में बाबा नीम करौरी का परिवार और उनके नाम से संचालित ट्रस्ट आमने-सामने नजर आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबा की छह पोतियों ने जिलाधिकारी को दी शिकायत में दावा किया है कि बाबा का पुराना घर, मंदिर और डाक बंगला Trust को दान नहीं किया गया था।

परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि इसके बावजूद इन संपत्तियों पर ट्रस्ट का कब्जा है और लंबे समय से वहां धार्मिक गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। शिकायत में प्रशासन से पूरे मामले की जांच करने और संपत्ति से संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की गई है।

प्रशासन ने जांच के दिए निर्देश

शिकायत सामने आने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। बताया जा रहा है कि राजस्व विभाग और प्रशासन की टीमें अब संपत्ति से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच कर रही हैं।

परिवार की मांग है कि जब तक Property Dispute Investigation पूरी नहीं हो जाती, तब तक ट्रस्ट के संचालन को प्रशासन अपने नियंत्रण में ले। हालांकि, संपत्ति पर वास्तविक अधिकार किसका है, इसका फैसला दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही स्पष्ट होगा।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया गलत

दूसरी ओर, ट्रस्ट ने परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को खारिज किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने दावा किया कि बाबा का घर, मंदिर और डाक बंगला विधिवत ट्रस्ट को सौंपा गया था।

ट्रस्ट का सवाल है कि यदि ये संपत्तियां ट्रस्ट को नहीं दी गई थीं, तो इतने वर्षों से वहां धार्मिक गतिविधियों का संचालन कैसे हो रहा है। ट्रस्ट की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि लंबे समय से वही इन स्थानों की देखरेख कर रहा है और परिवार ने पहले इस व्यवस्था पर आपत्ति क्यों नहीं जताई।

यानी फिलहाल इस मामले में Family vs Trust के दावे अलग-अलग हैं और संपत्ति के वास्तविक स्वामित्व को लेकर अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच और उपलब्ध दस्तावेजों से ही स्पष्ट होगी।

कैंची धाम को लेकर भी उठ चुके हैं सवाल

बाबा नीम करौरी से जुड़े संस्थानों को लेकर यह पहला विवाद नहीं है। इससे पहले उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में आने वाले दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर भी सवाल उठे थे। मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट तक पहुंचा था और मंदिर में आने वाले दान तथा ट्रस्ट के बैंक खातों से जुड़ी पारदर्शिता पर सवाल उठाए गए थे।

हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर मंदिर में प्राप्त होने वाले दान और उसके प्रबंधन से संबंधित जानकारी मांगे जाने की बात सामने आई थी। इसके बाद बाबा नीम करौरी से जुड़े धार्मिक संस्थानों की financial transparency और management system को लेकर चर्चा तेज हुई।

अब फिरोजाबाद की संपत्ति पर नजर

कैंची धाम से जुड़ा विवाद पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब बाबा नीम करौरी की जन्मस्थली से जुड़ी संपत्ति का मामला सामने आ गया है। इससे बाबा से जुड़े धार्मिक संस्थानों की संपत्तियों के प्रबंधन और उनके अधिकार को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिरोजाबाद की पैतृक संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोप फिलहाल शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। संपत्ति वास्तव में किसके नाम है, क्या इसे ट्रस्ट को हस्तांतरित किया गया था और ट्रस्ट के पास इसके संबंध में कौन से कानूनी दस्तावेज हैं, इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।